गुजरात के मेहसाणा जिले का चंदनकी गांव अपनी अनोखी और प्रेरणादायक पहल के लिए देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां किसी भी घर में खाना नहीं बनता, बल्कि पूरे गांव के लिए एक साझा रसोई हॉल है। मात्र ₹2000 महीने में एक पूरा परिवार दिन में तीनों वक्त भरपेट और स्वादिष्ट खाना खा सकता है।
यह व्यवस्था न सिर्फ किफायती है, बल्कि सामुदायिक एकजुटता का बेहतरीन उदाहरण भी है।
साझा रसोई के फायदे:
- समय और पैसे की बचत: हर परिवार रोजाना खाना बनाने के झंझट और खर्च से बच जाता है।
- सामुदायिक मेलजोल: सभी एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, जिससे गांव में एकता और भाईचारा बढ़ता है।
- भोजन की बर्बादी में कमी: थोक में खाना बनने से व्यर्थता कम होती है।
चंदनकी गांव अपनी साफ-सफाई, पक्की सड़कों और 24 घंटे बिजली की सुविधा के लिए भी जाना जाता है। यहां न मच्छर हैं और न ही खुले में शौच की समस्या — स्वच्छता के मामले में यह गांव नंबर वन है।
करीब 1300 की आबादी वाले इस गांव के 900 से अधिक युवा रोजगार के लिए अमेरिका और अहमदाबाद में बस चुके हैं। गांव में अब ज्यादातर बुजुर्ग रहते हैं। अकेलेपन से निपटने और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए बुजुर्गों ने यह साझा रसोई की पहल शुरू की। सुबह, दोपहर और शाम — तीनों वक्त यहां चाय, पानी और भोजन तैयार होता है, और 60 से 100 बुजुर्ग रोज एक साथ प्रेम से भोजन करते हैं।
चंदनकी गांव इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि मिल-जुलकर किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। यह पहल निश्चित रूप से दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा है।






