पराग अग्रवाल का सीक्रेट मिशन: एआई रिसर्च में बनाया नया साम्राज्य, चैटGPT-5 और गूगल को पीछे छोड़ा
एलन मस्क ने जब ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को पद से हटाया, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह चुपचाप ऐसा एआई साम्राज्य खड़ा करेंगे जो सिलिकॉन वैली को हिला देगा। अग्रवाल ने बिना किसी बड़े ऐलान या प्रेस विज्ञप्ति के Parallel Web Systems की नींव रखी और आज यह पूरी एआई इंडस्ट्री को चौंका रहा है।
चुपके से बनी सुपर टीम
अग्रवाल ने गूगल, स्ट्राइप और एयरबीएनबी से टैलेंटेड इंजीनियरों की टीम बनाई और खोसला वेंचर्स से 30 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। कोई प्रचार नहीं, कोई मार्केटिंग नहीं—बस गुपचुप तैयारी।
अक्टूबर 2024: Parallel Web Systems का उदय
अक्टूबर 2024 में Parallel सामने आया। इसका मिशन साफ था:
“हम वेब के दूसरे उपयोगकर्ता – एआई एजेंटों – के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं।”
यह न चैटबॉट था, न पारंपरिक भाषा मॉडल। यह पूरी तरह से नई सोच थी—एआई वेब पर जानकारी कैसे खोजता और उपयोग करता है, इसकी पुनर्कल्पना।
क्यों था यह ज़रूरी?
अग्रवाल ने 3 अरब डॉलर की उस समस्या को पहचाना जिसे अब तक नज़रअंदाज़ किया जा रहा था:
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GPT-5 नए डेटा लाने में 59% बार असफल रहता है।
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Google Gemini अक्सर तथ्यात्मक भ्रम फैलाता है।
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Amazon/Cloud सिस्टम ऐसे स्रोत गढ़ देते हैं जो असल में मौजूद ही नहीं।
परिणामस्वरूप कंपनियाँ खराब AI रिसर्च पर अरबों डॉलर गंवा रही थीं।
Parallel का क्रांतिकारी समाधान
Parallel ने 8 अलग-अलग रिसर्च इंजन बनाए, जो हर स्तर पर अलग गति और गहराई से काम करते हैं।
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Ultra1x: 60 सेकंड में त्वरित परिणाम
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Ultra8x: 30 मिनट का गहन विश्लेषण
एक ही मॉडल से सब कुछ कराने की बजाय, हर इंजन का काम तय है।
नतीजे हैरान करने वाले
Parallel ने एआई रिसर्च की सटीकता में इतिहास रच दिया:
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Parallel: 58%
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GPT-5: 41%
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Google: 23%
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Anthropic: 7%
यानी GPT-5 से पूरे 17 अंक आगे।






