मार्क जुकरबर्ग पर 8 अरब डॉलर का मुकदमा, मेटा शेयरधारकों ने लगाए गंभीर आरोप — ट्रायल शुरू
मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और कंपनी के अन्य वर्तमान व पूर्व शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ 8 अरब अमेरिकी डॉलर के हाई-प्रोफाइल मुकदमे का ट्रायल गुरुवार को डेलावेयर चांसरी कोर्ट में शुरू हो गया है। यह केस मेटा के शेयरधारकों ने दायर किया है, जिसमें आरोप है कि कंपनी ने फेसबुक यूज़र्स की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ किया और अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) के साथ 2012 में हुए समझौते का उल्लंघन किया।
कैसे शुरू हुआ मामला?
यह विवाद 2018 में सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि कैम्ब्रिज एनालिटिका, एक राजनीतिक परामर्श कंपनी, ने करोड़ों फेसबुक यूज़र्स का डेटा अनधिकृत तरीके से हासिल किया था। यह फर्म 2016 में डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति चुनावी मुहिम के लिए काम कर रही थी। इस मामले में एफटीसी ने फेसबुक पर 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था।
अब मेटा के शेयरधारक यह मांग कर रहे हैं कि एफटीसी के इस जुर्माने और अन्य कानूनी खर्चों — कुल मिलाकर 8 अरब डॉलर — की भरपाई मार्क जुकरबर्ग और उन अधिकारियों से की जाए, जिन्होंने कंपनी की निगरानी में लापरवाही बरती।
ट्रायल की शुरुआत और प्रमुख गवाह
इस गैर-जूरी ट्रायल की सुनवाई डेलावेयर चांसरी कोर्ट की चीफ जज कैथलीन मैककॉर्मिक कर रही हैं — वही जज जिन्होंने पिछले साल एलन मस्क के 56 अरब डॉलर के टेस्ला पे पैकेज को खारिज कर दिया था।
मामले की शुरुआत वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्राइवेसी एक्सपर्ट नील रिचर्ड्स की गवाही से हुई, जिन्होंने कोर्ट में कहा कि फेसबुक की प्राइवेसी पॉलिसी “भ्रामक” थीं और यूज़र्स को गुमराह किया गया।
किन अधिकारियों के नाम शामिल?
इस मुकदमे में सिर्फ मार्क जुकरबर्ग ही नहीं, बल्कि कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी हैं:
- शेरिल सैंडबर्ग (पूर्व COO)
- मार्क आंद्रेसेन (बोर्ड मेंबर)
- पीटर थील (वेंचर कैपिटलिस्ट)
- रीड हेस्टिंग्स (नेटफ्लिक्स को-फाउंडर)
- जेफ्री जायंट्स (व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ)
मेटा की ओर से क्या कहा गया?
अब तक मेटा या जुकरबर्ग ने इस मामले में कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट में दी गई फाइलिंग्स में आरोपों को “अत्यधिक” बताते हुए कंपनी ने दावा किया है कि उसने एफटीसी समझौते का पालन करने के लिए बाहरी कंसल्टिंग फर्म को नियुक्त किया था। मेटा का तर्क है कि असल में वह खुद कैम्ब्रिज एनालिटिका की धोखाधड़ी का शिकार हुई।
क्यों खास है यह केस?
यह मुकदमा केयरमार्क दावे की श्रेणी में आता है — यानी इसमें आरोप है कि कंपनी के बोर्ड ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया और निगरानी में चूक हुई। डेलावेयर का कॉर्पोरेट कानून ऐसे मामलों को आम तौर पर चुनौतीपूर्ण मानता है, लेकिन हाल के वर्षों में ऐसी याचिकाएं तेजी से स्वीकार की जा रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रायल ऐसे समय में शुरू हुआ है जब डेलावेयर में नए कानून पास हुए हैं, जो किसी कंपनी के नियंत्रक शेयरधारकों (जैसे जुकरबर्ग) पर मुकदमा करना और कठिन बना देते हैं।
आगे क्या?
यह ट्रायल मेटा के लिए कानूनी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर गंभीर परिणाम ला सकता है। यदि कोर्ट इस केस में मेटा शेयरधारकों के पक्ष में फैसला देती है, तो यह तकनीकी कंपनियों की डेटा नीति और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर एक नया मिसाल बन सकता है।






