नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने गुरुवार को दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई की। डॉग लवर्स की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए कहा कि बिना नोटिस स्वतः संज्ञान लेकर आदेश देना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया – “यह कैसा आदेश है?” इस पर कोर्ट ने पूछा, “क्या आपने आदेश पढ़ा है?” सिब्बल ने जवाब दिया, “जी…” और अंतरिम रोक लगाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अंतरिम रोक पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
सरकार का पक्ष:
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने तर्क दिया कि इस मुद्दे पर दो तरह के लोग हैं – एक, जो बोलते हैं; और दूसरे, जो वास्तव में पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे मर रहे हैं, कई वीडियो इसके सबूत हैं। नसबंदी एक विकल्प है, लेकिन रेबीज और डॉग बाइट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। उनका कहना था कि बहुमत उन लोगों का है जो परेशान हैं। सिब्बल ने जवाब दिया कि यह पहली बार सुन रहा हूं कि सरकार नियम लागू नहीं कर पाई, जबकि होने चाहिए थे।
हलफनामा दाखिल करने का आदेश:
कोर्ट ने सिब्बल से कहा कि आदेश में दिल्ली-NCR के विभिन्न इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने, शेल्टर बनाने और दो माह में रिपोर्ट देने का निर्देश है। इस पर सिब्बल ने तर्क दिया कि असली समस्या यह है कि पकड़े गए कुत्तों को छोड़ा न जाए, लेकिन सवाल है कि उन्हें रखा कहां जाएगा। मौजूदा शेल्टर बहुत कम हैं और जगह की कमी उन्हें और आक्रामक बना सकती है, इसलिए रोक लगनी चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह मामला एक तरफ मानवीय पीड़ा और दूसरी तरफ पशुप्रेम से जुड़ा है। कोर्ट ने सभी हस्तक्षेपकर्ताओं को शपथपत्र व साक्ष्यों के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।






