जिनका प्रातःकाल स्मरण मात्र ही बड़े-बड़े पापों का नाश कर देता है और जीवन में सौभाग्य लाता है। ये हैं पंचकन्या।
प्रसिद्ध श्लोक:
अहल्या द्रौपदी कुन्ती तारा मन्दोदरी तथा।
पंचकन्या: स्मरेन्नित्यं महापातकनाशिनी:॥
ये देवियाँ विवाहित होकर भी अपनी अतुलनीय पवित्रता, धैर्य और धर्मपरायणता के कारण “चिर कुमारी” मानी जाती हैं। आइए, जानते हैं इनका परिचय:
1. अहल्या: ऋषि गौतम की पत्नी और अद्भुत सौंदर्य की स्वामिनी। छल का शिकार होने पर भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अंततः भगवान राम के चरणों के स्पर्श से पत्थर से पुनः नारी बनीं। वे पवित्रता की मूरत हैं।
2. द्रौपदी: महाभारत की मुख्य नायिका और पाँच पांडवों की पत्नी। अग्नि से जन्मी ‘याज्ञसेनी’ ने जीवन भर अन्याय का सामना किया, लेकिन उनका स्वाभिमान और भगवान कृष्ण पर अटूट विश्वास नारी शक्ति की मिसाल है।
3. कुंती: पांडवों की माता और त्याग की प्रतिमूर्ति। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने पुत्रों को धर्म की राह पर चलाने के लिए सदैव प्रेरित किया। वे ममता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं।
4. तारा: वानरराज बाली की पत्नी। वे अत्यंत बुद्धिमती और दूरदर्शी थीं। उन्होंने हमेशा बाली को सही सलाह दी और उनकी मृत्यु के बाद भी अपने विवेक से राज्य का हित सोचा। वे बुद्धि और विवेक की देवी हैं।
5. मंदोदरी: रावण की पटरानी और एक महान शिवभक्त। लंका के अधर्म के वातावरण में रहकर भी उन्होंने हमेशा धर्म का पक्ष लिया और रावण को सीता माता को लौटाने की सलाह दी। वे सतीत्व और सद्गुणों की आदर्श हैं।
ये पंचकन्याएँ हमें सिखाती हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा पर अडिग रहना ही सच्ची शक्ति है। इनका स्मरण हमारे जीवन में सुख, शांति और पवित्रता लाता है।
अधिक मास में 33 की संख्या में वस्तुए दान करने का महत्व क्यों है
अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) में 33 की संख्या में दान करने का अत्यधिक धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है,यह दान मुख्यत भगवान विष्णु की कृपा,पितरों की शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। अधिक मास में कुंवारे (UNMARRIED)व्यक्ति क़ो दान करने से बचना चाहिए,ऐसे समय में धार्मिक यात्रा पूजा पाठ संकीर्तन नाम सुमिरन तीर्थ स्नान का बहुत महत्व होता है।
दान करने का महत्व
हिन्दू सनातन धर्म में 33 कोटि देवी-देवता माने गए हैं। 33 वस्तुओं का दान करके इन सभी देवताओं को प्रसन्न किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
33 का आंकड़ा अधिक मास सामान्यत हर 32-33 महीनों के अंतराल पर अधिकमास आता है,इसलिए इस मास में 33 की संख्या को बहुत शुभ और पवित्र माना गया है। दान हमेशा सुपात्र क़ो ही देना चाहिए वैष्णव ब्राह्मण क़ो जो ब्राह्मण प्याज़ लहसुन गुटखा पान तम्बाकू नहीं खाता हो ईश्वर का नाम जाप सुमिरन सतकर्म पुण्य कार्य करता हो ऐसे ही व्यक्ति क़ो दान देना चाहिए।
पृथ्वी दान का पुण्य धार्मिक ग्रंथों जैसे निर्णयसिन्धु के अनुसार,33 मालपुओं (या अन्य 33 वस्तुओं) का दान करने से “पृथ्वी दान” के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। मालपुआ 33 मालपुए का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है।
क्या दान किया जाता है?
33 वस्तुओं में आमतौर पर पूजा पाठ की सामग्री धार्मिक ग्रंथ,सुहाग सामग्री,मिट्टी का कलश एवं मालपुएअनारसे या कोई भी मीठी वस्तु (जैसे पेड़े,बताशे) कांसे या पीतल के बर्तन में रखकर दान की जाती है। इसके अलावा,मिठाई,मौसमी फल,सब्जी,अनाज,पीले वस्त्र भी 33 की संख्या में वैष्णव ब्राह्मणों को ही दान करना चाहिए। किसी वैष्णव ब्राह्मण क़ो पूरे 33 दिन का घर का खाने पीने का राशन आदि का सामान भी दान कर सकते हैं।
आप इसे एक ही बार में या अलग-अलग दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके दान कर सकते हैं अधिक मास मे जरूर करे,ये 33 चीजों का दान अलग अलग 33 वस्तु गिनती करके भी कर सकते हैं। दान वित्त समान होता है जितना जिसकी सामर्थ हो उतना ही करना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति का पीडीऍफ़ मैसेज या लिंक मत खोलें
हम किसी का पीडीऍफ़ मैसेज नहीं खोलते जिनको हम नहीं जानते या बात नहीं होजाए तब तक,क्यों कि
मेरे पास परसों किसी मोबाइल हैकर का पीडीऍफ़ आया,जिसके नंबर से आया मैसेज उसको पता भी नहीं कि उसके नंबर से कोई pdf भेजा है,ज़ब मैंने उसको फ़ोन किया बोला उसको आप खोलना मत मेरा मोबाइल किसी ने हैक कर लिया है, इसीलिए किसी भी व्यक्ति का Link लिंक पीडीऍफ़ PDF नहीं खोलें और ना किसी क़ो फ़ाइल भेजें ना किसी की खोलें
जो भी आपको किसी क़ो सूचना देनी है या कुछ और भेजना है Text मैसेज मेँ लिखें।
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻



