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Somvati Amavasya 2026: जानें पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और राशि अनुसार उपाय

Daily panchang,आज सोमवती अमावस्या पर घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए और अपने राशि के अनुसार करें महा उपाय

🌤️ दिनांक – 15 जून 2026
🌤️ दिन – सोमवार
🌤️ विक्रम संवत (2083)
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – अमावस्या सुबह 08:23 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
🌤️ नक्षत्र – मृगशिरा शाम 07:08 तक तत्पश्चात आर्द्रा
🌤️ योग – शूल सुबह 08:56 तक तत्पश्चात गण्ड
🌤️*राहुकाल – सुबह 07:37 से सुबह 09:18 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:58
🌤️ सूर्यास्त – 07:20
दिशाशूल – पूर्व दिशा मे

आज सोमवती अमावस्या पर घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए और अपने राशि के अनुसार करें महा उपाय आओ जानें

अधिक मास की समाप्ति सोमवती अमावस्या का अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। पितरों के आशीर्वाद, सुख-समृद्धि और कष्टों के निवारण के लिए यह दिन अमृत समान है।

आज मासिक संक्रांति भी है

मेष राशि
उपाय: हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाएं और शिवलिंग पर जल में लाल चंदन मिलाकर अर्पित करें।
लाभ: कर्ज से मुक्ति और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी।

वृषभ राशि
उपाय: शिवलिंग पर कच्चा दूध और मिश्री अर्पित करें। किसी जरूरतमंद को चावल और चीनी का दान करें।
लाभ: मानसिक शांति मिलेगी और आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

मिथुन राशि
उपाय: मूंग की दाल या हरी वस्तुओं का दान करें। गाय को हरा चारा खिलाएं।
लाभ: व्यापार में उन्नति और वाणी का प्रभाव बढ़ेगा।

कर्क राशि
उपाय: सोमवती अमावस्या के दिन चांदी के पात्र में गंगाजल और दूध मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।
लाभ: स्वास्थ्य में सुधार होगा और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।

सिंह राशि
उपाय: सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और मंदिर में गेहूं या गुड़ का दान करें।
लाभ: मान-सम्मान में वृद्धि और सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी।

कन्या राशि
उपाय: अनाथालय या किसी गरीब को काले तिल और वस्त्र दान करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
लाभ: रुके हुए काम पूरे होंगे और शत्रुओं पर विजय मिलेगी।

तुला राशि
उपाय: सफेद चंदन का तिलक लगाएं और शिवलिंग पर सफेद फूल (मदार या चमेली) अर्पित करें।
लाभ: वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।

वृश्चिक राशि
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
लाभ: संकटों से रक्षा होगी और पारिवारिक सुख बढ़ेगा।

धनु राशि
उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पीले फल, चने की दाल या हल्दी का दान करें।
लाभ: भाग्य का साथ मिलेगा और ज्ञान व बुद्धि में वृद्धि होगी।

मकर राशि
उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें और काले तिल, तेल या उड़द की दाल का दान करें।
लाभ: नौकरी में प्रमोशन और साढ़ेसाती के कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

कुंभ राशि
उपाय: चींटियों को आटा डालें और सोमवती अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करें।
लाभ: मानसिक भ्रम दूर होगा और धन के नए स्रोत खुलेंगे।

मीन राशि
उपाय: भगवान शिव को चंदन का लेप लगाएं और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र या अन्न का दान करें।
लाभ: आत्मिक शांति और जीवन में स्थिरता आएगी।

* अमावस्या के सामान्य नियम (सबके लिए)*

1. पीपल पूजा: सुबह पीपल के वृक्ष की ७ परिक्रमा करें और जल अर्पित करें।
2. दीपदान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम का दीपक जरूर जलाएं।
3. मौन/संयम: इस दिन वाद-विवाद से बचें और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

“ॐ नमः शिवाय। पितृभ्यो नमः।”
इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाएं और अपने जीवन को खुशहाल बनाएं।

सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ तिथि मानी जाती है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और भगवान शिव की पूजा से विशेष पुण्य प्राप्त होता है तथा पितरों की कृपा भी मिलती है। इस दिन व्रत रखने और पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

यह दिन स्नान, दान, व्रत और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सूर्योदय के समय पवित्र नदी में स्नान करना बहुत फलदायी माना जाता है।

सोमवती अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है?
सोमवती अमावस्या को पितरों की शांति और भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष तिथि माना जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और अमावस्या तिथि पितरों की पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब ये दोनों योग एक साथ आते हैं, तो यह दिन अत्यंत शुभ और प्रभावशाली बन जाता है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से जीवन की बाधाएँ कम हो जाती हैं। साथ ही भगवान शिव की आराधना करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

सोमवती अमावस्या पर पवित्र स्नान का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि किसी कारणवश गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है।

स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और पितरों का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की विशेष पूजा क्या है?
इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

शिव मंदिर में जाकर दीपक जलाना और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान शिव की कृपा से जीवन के अनेक संकट दूर हो सकते हैं।

सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का महत्व क्या है।
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में देवताओं का निवास होता है। इस दिन पीपल वृक्ष के चारों ओर जल अर्पित करना, दीपक जलाना और परिक्रमा करना विशेष पुण्य देता है।

महिलाएँ विशेष रूप से परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए पीपल वृक्ष की परिक्रमा करती हैं।

सोमवती अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व क्या है?
इस पवित्र दिन दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

इस दिन विशेष रूप से इन वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है:

* अन्न दान

* वस्त्र दान

* तिल और गुड़ का दान

* जल दान

* ब्राह्मणों को भोजन कराना

दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की समस्याएँ कम होती हैं।

सोमवती अमावस्या व्रत के आध्यात्मिक लाभ कौन-कौन से है?
यदि श्रद्धा और नियम के साथ सोमवती अमावस्या का व्रत किया जाए, तो इसके अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

* पितृ दोष से राहत मिलती है

* परिवार में सुख और शांति बढ़ती है

* मानसिक तनाव कम होता है

* जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है

* आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

15 जून 2026 की सोमवती अमावस्या भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और पितरों की शांति के लिए अत्यंत पवित्र अवसर है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ स्नान, व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

यदि इस पावन तिथि पर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना और पितरों का स्मरण किया जाए, तो जीवन की अनेक बाधाएँ दूर हो सकती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संपूर्ण पुरुषोत्तम मास का महापुण्य समृद्धि की वृद्धि के सभी शास्त्रीय उपाय

समृद्धि बढ़ाने के लिए
कर्जा हो गया है तो अमावस्या के दूसरे दिन से पूनम तक रोज रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे, समृद्धि बढेगी ।
दीक्षा मे जो मन्त्र मिला है उसका खूब श्रध्दा से जप करना शुरू करें,जो भी समस्या है हल हो जायेगी ।

स्कन्दपुराण‬ के प्रभास खंड के अनुसार
“अमावास्यां नरो यस्तु परान्नमुपभुञ्जते ।। तस्य मासकृतं पुण्क्मन्नदातुः प्रजायते”
जो व्यक्ति ‪अमावस्या‬ को दूसरे का अन्न खाता है उसका महिने भर का पुण्य उस अन्न के स्वामी/दाता को मिल जाता है।

खेती के काम में ये सावधानी रहे
ज़मीन है अपनी… खेती काम करते हैं तो अमावस्या के दिन खेती का काम न करें …. न मजदूर से करवाएं | जप करें भगवत गीता का ७ वां अध्याय अमावस्या को पढ़ें …और उस पाठ का पुण्य अपने पितृ को अर्पण करें … सूर्य को अर्घ्य दें… और प्रार्थना करें ” आज जो मैंने पाठ किया …अमावस्या के दिन उसका पुण्य मेरे घर में जो गुजर गए हैं …उनको उसका पुण्य मिल जाये | ” तो उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पति बढ़ेगी |

सोमवती अमावस्या व्रत कथा महत्व

सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान,पितृ तर्पण और पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। व्रत कथा का श्रवण करने और विधि-विधान से पूजा करने से अखंड सौभाग्य और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।सोमवती अमावस्या का महत्व
सौभाग्य में वृद्धि सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र,अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। पितृ कृपा इस तिथि को पितरों (पूर्वजों) के निमित्त श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इससे पितृ दोष समाप्त होता है।
अक्षय पुण्य सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर स्नान करने या दान-पुण्य करने से हजारों गायों के दान के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सुबह जल्दी उठकर गंगा नदी या किसी पवित्र सरोवर में स्नान करें। यदि यह संभव न हो,तो घर के नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। शिव जी और विष्णु जी की पूजा भगवान शिव का गंगाजल,दूध और शहद से अभिषेक करें। साथ ही,भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें।
पीपल वृक्ष की पूजा पीपल के पेड़ में ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों देवों का वास माना जाता है। पेड़ की जड़ में दूध और जल अर्पित करें। परिक्रमा पीपल के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए 3, 5 या 108 बार परिक्रमा करें। इस दौरान अपनी क्षमता के अनुसार सुहाग का सामान (सिंदूर, चूड़ी आदि) दान करें।दान पूजा के बाद गरीबों को अन्न,वस्त्र या फल का दान करें।
सोमवती अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार,एक बार एक साहूकार के सात बेटे थे। उसकी इकलौती बेटी बहुत गुणवान थी, लेकिन विवाह के बाद उसका पति अल्पायु निकला (उसकी मृत्यु होने वाली थी)। बेटी के भाग्य के कारण, किसी भी पंडित ने उसे आशीर्वाद देने की हिम्मत नहीं की।एक दिन एक सिद्ध गौरी (पार्वती) नामक वृद्धा देवी उस गांव से गुजरीं। साहूकार की बेटी ने उनकी बहुत सेवा की और उनके पैर दबाए। वृद्धा ने खुश होकर उसे अमर सुहाग का आशीर्वाद दिया। साहूकार की बेटी ने बताया कि उसके पति की मृत्यु होने वाली है। यह सुनकर देवी गौरी ने उसे सोमवती अमावस्या का व्रत करने की विधि बताई।देवी के कहे अनुसार, साहूकार की बेटी ने अमावस्या पर पीपल के पेड़ की परिक्रमा करके व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से यमराज को उसके पति के प्राण वापस लौटाने पड़े। तभी से सुहागिनों द्वारा इस व्रत को करने की परंपरा अटूट रूप से चली आ रही है।

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Author: sssrknews

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