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भगवान की पुकार: मुझे नौकर नहीं, ईश्वर समझो

भगवान का संदेश ।

तुम
करोड़ों
हो
और मैं
एक हूँ।

मुझे
शांति
से रहना है,
लेकिन…

तुम्हें
शोर
करना आता है, इसलिए मुझे
वस्त्र
पहनाकर, एक गुड़िया की तरह सजा देते हो।

भोग
मुझे लगाते हो,
और
खाते
खुद हो!

जिस दिन मैं एक लड्डू
खा लूँगा,
उस दिन से
प्रसाद
चढ़ाना बंद हो जाएगा,
यह मैं जानता हूँ।

जिसकी
शादी
नहीं हो रही,
वह
मंगल फेरे
मांगता है।

जिसकी
संतान
नहीं है,
वह
पालना
मांगता है।

किसी को
नौकरी
चाहिए,
तो किसी को
शादी
के लिए
लड़की।

माता-पिता शायद किसी को नहीं चाहिए,
लेकिन
संपत्ति
सबको चाहिए।

कोई
कमाना
चाहता है,
तो कोई
हराम का
खाना चाहता है।

किसी को
बाज़ार
ऊँचा ले जाना है,
तो किसी को
नीचे गिरा
देता है
मुफ्त का
माल सबको
चाहिए।

कोई
रोटी
मांगता है,
तो कोई
मकान आलीशान ।

जो भी आता है,
घंटी
बजाकर मेरे
कानों को परेशान करता है।

अगर मैं किसी का काम नहीं करता,
तो मेरे प्रति उसकी
श्रद्धा
कम हो जाती है।

और अगर किसी का काम हो जाए,
तो मुझे
महाभोग
चढ़ाया जाता है।

बारिश
नहीं आती,
तो
यज्ञ
किया जाता है।

आकाश से विपत्ति आती है,
तो मुझे ही क्षमा माँगने को कहा जाता है।

लेकिन सच कहूँ,
मैं कुछ नहीं करता।

न मैं किसी की शादी कराता हूँ,
न किसी का रिश्ता तुड़वाता हूँ।

जंगल
मैंने नहीं काटे।

ऊँची-ऊँची इमारतें
मैंने नहीं बनाईं।

अमीर
मैं नहीं बनाता।

गरीबी
मैंने नहीं दी।

तुम्हें रहने के लिए
हरी-भरी पृथ्वी
दी थी,
अगर तुम उसे
राख
बना दो,
तो इसमें मेरा क्या दोष?

मैंन
तुम्हें
अणु
दिया,
और तुमने
परमाणु
बम
बना लिया।

फिर कहते हो कि
शांति
स्थापित करो
प्रभू ।

बताओ, मैं कैसे करूँ?

सच-सच बताओ,
तुम मुझे
ईश्वर
मानते हो
या
नौकर?

प्रार्थना
की आड़ में
तुम
आदेश
ही तो देते हो।

और फिर कहते हो कि
इतनी
सेवा
करने के बाद भी
मैं किसी की सुनता नहीं!

मैं कोई
मैरेज ब्यूरो
नहीं चलाता,
न ही कोई
रोजगार कार्यालय।

मैंने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं,
और न ही मुझे किसी से कुछ चाहिए।

नारियल चढ़ाकर
मुझे और शर्मिंदा मत करो।

जो देना था, मैं दे चुका हूँ।
अब मेरे पास कुछ नहीं है।
कृपया अब कुछ माँगकर
मुझे शर्मिंदा मत करो।

जो लोग कहते हैं कि
तुम्हारा काम हो जाएगा,
वे मेरे कोई
सहायक या कमीशन एजेंट
नहीं हैं।

इसलिए ऐसे लोगों से बचो।

तुमने आज तक
बहुत सारी प्रार्थनाएँ की हैं,
लेकिन आज
मैं तुमसे
एक प्रार्थना करता हूँ।

और यह भी जानता हूँ कि
मेरी यह बात सुनने के बाद
शायद कोई
मंदिर में
मेरे पास आने भी न आए।
फिर भी कहूँगा…

अगर कोई
माँग
न हो,
तभी मेरे पास आना।

और हाँ…

अंत में बस इतना ही कहूँगा कि
मैं वही करूँगा
जो तुम्हारी
नियत मै है ।

अपने
कर्मों
पर ध्यान देना।
और
अपनी
व्यथा
को समझने की कोशिश करना।

इसी आशा के साथ…

मैं बचन
देता हूँ।

यह सब
तुम्हारे
कर्मों का चक्र
है।

कर्म अपना फल दिए बिना कभी नहीं रहते।

✅ जैसे कर्म करोगे, वैसा ही फल भोगोगे।
यही सत्य है 🙏✨

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Author: sssrknews

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