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ब्रह्ममुहूर्त में उठते ही पृथ्वी को प्रणाम क्यों और कैसे करें? जानिए नवग्रहों के शुभ-अशुभ फलों का रहस्य

ब्रह्ममुहूर्त में उठते ही पृथ्वी को प्रणाम कैसे करें आओ जानें

ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 4 बजे से 5:30 तक उठ जाना चाहिए,सुबह उठते ही धरती पर पैर रखने से पहले,बिस्तर पर बैठे-बैठे ही अपनी दाईं (सीधी) हथेली से पृथ्वी को स्पर्श करें और क्षमा मांगें।इस आसान प्रक्रिया का पालन करें।स्पर्श बिस्तर से उठकर ज़मीन पर पैर रखने से पहले,दाएं हाथ को ज़मीन (या पृथ्वी) पर रखें।
प्रार्थना अपनी हथेलियों को मस्तक से लगाएं।
मंत्र निम्नलिखित प्रार्थना या मंत्र का उच्चारण करें।
समुद्र-वसने देवि पर्वत-स्तन-मण्डले ।विष्णु-पत्नि नमस्तुभ्यं पाद-स्पर्शं क्षमस्व मे ॥
भावार्थ हे समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली, पर्वतों रूपी स्तनों वाली और भगवान विष्णु की पत्नी पृथ्वी माता! आपको मेरा नमस्कार है। मैं आपके ऊपर अपने पैर रखने जा रहा हूँ, कृपया इस स्पर्श के लिए मुझे क्षमा करें।कुछ अन्य बातें
माना जाता है कि ऐसा करने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।यह हमें भूमि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ (धन्यवाद) होने का भाव सिखाता है।अगर आप अपनी दिनचर्या को और अधिक व्यवस्थित बनाना चाहते हैं, तो क्या आप जानना चाहेंगे सुबह उठकर हथेलियों को देखने का मंत्र क्या है? ज़मीन पर पैर रखते समय कौन सा स्वर (दायां या बायां) देखना चाहिए।

नवग्रह क्या फल देते हैं
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह कमजोर, नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो जाता है, तो वह अपने शुभ फल पूरी तरह नहीं दे पाता। आइए जानते हैं कि कौन सा ग्रह पीड़ित होने पर कैसी समस्याएं दे सकता है—

मंगल पीड़ित हो तो
बार-बार क्रोध आना, चोट लगना, दुर्घटनाएं, विवाद और भूमि संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

गुरु पीड़ित हो तो
संतान सुख में बाधा, आर्थिक परेशानियां, गलत निर्णय और सम्मान में कमी देखने को मिल सकती है।

चंद्रमा पीड़ित हो तो
मन अशांत रहता है, चिंता, डर, तनाव और मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

सूर्य पीड़ित हो तो
सरकारी कार्यों में बाधा, पिता से मतभेद, आत्मविश्वास की कमी और मान-सम्मान में कमी हो सकती है।

शनि पीड़ित हो तो
कामों में देरी, बार-बार संघर्ष, मेहनत का पूरा फल न मिलना और जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ सकता है।

बुध पीड़ित हो तो
निर्णय लेने में कठिनाई, पढ़ाई में बाधा, व्यापार में गलत फैसले और संवाद संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

राहु पीड़ित हो तो
भ्रम, मानसिक तनाव, अचानक उतार-चढ़ाव, बदनामी और अनावश्यक परेशानियां बढ़ सकती हैं।

केतु पीड़ित हो तो
अकेलापन, असंतोष, अचानक नुकसान और आध्यात्मिक भ्रम की स्थिति बन सकती है।

समस्या नहीं, उसके मूल कारण को पहचानिए — तभी सही समाधान मिलेगा।
“किस्मत भी खुलेगी और भाग्य भी चमकेगा”।।

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Author: sssrknews

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