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क्या था ‘परमिट राज’ का दौर? जब चीनी, सीमेंट और गैस कनेक्शन के लिए भी लगती थी मंजूरी

#भारतविमर्श
नेहरू चाचा ने इतना सशक्त भारत बनाया कि 𝟏𝟗𝟖𝟒 में जब इंदिरा जी की मृत्यु हुई और राजीव गाँधी जी प्रधान मंत्री बने, तो देश मे आम नागरिक को दो बोरी सीमेन्ट लेने के लिये भी तहसीलदार से परमिट लेना पड़ता था। ऐसा लम्बे समय तक चला रहा!

01 एक किलो चीनी खरीदने तक के लिये भी परमिट लगता था। शादी विवाह में एक क्विंटल चीनी लेने के लिये,तो लोग महीनों पहले से सोर्स सिफारिश खोजते फिरते थे। ऐसा वृद्ध लोगों ने देखा है!

तब भारत में एलपीजी के कनेक्शन के लिये 0𝟐 दो से 0𝟑 तीन साल से लेकर 05/10 साल तक का समय लगता था। यकीन मानिए, घर में एलपीजी होते हुए, भी गृहणियां स्टोव जलाती थीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि, अगर गैस खत्म हो गयी, तो ब्लैक और लम्बी लम्बी लाइनों में रात भर लगने के बाद अगला पूरा दिन खड़े रह, गैस सिलेंडर भरवाना बहुत बड़ा काम था। एजेंसी के सामने बहुत लम्बी लाइन होती थी!

ये वो ज़माना था, जब देश मे बजाज स्कूटर प्रीमियम पर बिकते थे, मतलब 𝟓𝟎𝟎𝟎 का स्कूटर और 𝟔𝟎𝟎𝟎 ब्लैक! तब 𝟏𝟏,𝟎𝟎𝟎 में स्कूटर मिलेगा। तब टेलीफोन के कनेक्शन मिलने में 0𝟕 से 𝟏𝟎 साल लग जाते थे और बहुत जबरदस्त ब्लैक होती थी।

इसी तरह सन 1970 के आसपास ट्रैक्टर खरीदना के लिए नंबर लगाना पडता था और उस समय में मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर की कीमत लगभग 18 हजार रुपए थी और उसका नंबर आने में 10 से 15 साल लगते थे, तथा तत्काल लेने पर करीब 15 हजार के अधिक देना पडता था! यह राशि उस वक्त बहुत अधिक थी!

उस नेहरु खानदान के शासनकाल के जमाने में हर किसी वस्तु का ब्लैक मार्केटिंग होता था। साथ ही हर तरह के खाद्य पदार्थ और सीमेंट जैसी अनेक प्रकार की वस्तुओं में बहुत मिलावट होती थीं।

आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसका एक और क़िस्सा सुनिये। नेहरू चचा ने 𝟏𝟗𝟓𝟕 में राजधानी दिल्ली के विकास के लिए 𝐃𝐃𝐀 की स्थापना की।

ऐसी एजेंसी जो मास्टर प्लान बनाती थी,उसमें अगले 𝟓𝟎 वर्षों की ही प्लानिंग करती थी कि, 𝟓𝟎 साल बाद ये शहर कैसा होगा। इसकी प्लानिंग करके ही शहर बसाया जाता है। उसकी सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे स्टेशन, बिजली पानी की व्यवस्था सब 𝟓𝟎 साल का सोच कर की जाती है।

नेहरू चाचा कहते थे, “मेरे सपनों का भारत” चाचा ने सपने में भी कभी नही सोचा था कि, दिल्ली वाले जिंदगी में कभी कार तो क्या, स्कूटर भी खरीद पाएंगे इसलिये 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में बनाये गए, दिल्ली के 𝐃𝐃𝐀 फ्लैट्स देख लीजिये। किसी फ्लैट में कार, तो छोड़ो स्कूटर खड़ा करने तक की जगह नहीं है।

नेहरू चाचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे, इसकी एक और मिसाल ‘𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐔𝐧𝐛𝐨𝐮𝐧𝐝𝐬’ नामक किताब के लेखक गुरुचरण दास ने दी है। आप 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में 𝐏&𝐆 के 𝐂𝐄𝐎 रहे हैं। नेहरू जी एवं इंदिरा जी के भारत में किसी कंपनी को टूथपेस्ट की ज़्यादा ट्यूब बनाने के लिए भी भारत सरकार से आज्ञा लेनी पड़ती थी और वो आज्ञा बहुत देरी में मिलती थी!

𝟕𝟎 के दशक में एक बार तमिलनाडु में फ्लू फैल गया 𝐏&𝐆 का मशहूर विक्स इन्हेलर और विक्स वेपोरब तब भी बनता था। फ्लू फैला, तो विक्स बाजार से गायब हो गई। कंपनी ने भारत सरकार से 0𝟓 लाख अतिरिक्त विक्स इन्हेलर बनाने की इजाजत मांगी। वो इजाजत डेढ़ महीने में आयी, तब तक फ्लू ठीक हो चुका था। हमेशा ऐसा ही होता था!

बजाज के पास तब भी यह क्षमता थी कि, वे लाखों स्कूटर बना देते, पर नेहरू जी और इंदिरा जी ने उनको कभी भी बड़ी संख्या में स्कूटर बनाने नहीं दिए, जिससे ब्लैक मार्केटिंग बंद हो सके।

गुरुचरण दास लिखते हैं कि, बिड़ला जी के एक बेटे आदित्य बिड़ला ने भारत मे जब हिंडाल्को खड़ी की, तो नेहरू इंदिरा ने उनको इतना परेशान किया कि, उन्होंने फिर कभी देश में लम्बे समय तक कोई फैक्ट्री नहीं लगाई। जबकि उन्होंने अपने जीवन मे देश के बाहर 𝟑𝟐 बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरी लगाई। ….!!

साभार : नेहा अग्रवाल जी

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Author: sssrknews

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