अयोध्या: श्रीराम मंदिर में एक ओर चढ़ावा चोरी की पांच दिनों से जांच गतिशील है, तो दूसरी ओर विराजमान रामलला और परिसर में विराजे अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े देखें तो साफ है कि विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच के बीच भी भक्तों की आस्था पर कोई आंच नहीं आई है।
इन दिनों श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सभी मंदिरों में दर्शन के लिए पास की कोई अनिवार्यता नहीं रखी गई है, इसलिए श्रद्धालु इच्छानुसार मंदिरों में दर्शन करके गंतव्य को प्रस्थान करते दिखते हैं। दोपहर की चटख धूप में भले श्रद्धालुओं की संख्या में थोड़ी कमी दिखती है, परंतु सुबह व शाम के समय मंदिर में आस्था का जनज्वार दिखाई पड़ता है।
रामलला का दर्शन करने पहुंचे कुछ श्रद्धालुओं से जब दैनिक जागरण ने उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो सबका एक स्वर में यही कहना था कि चढ़ावा चोरी के मामले में दोषी चाहे कोई भी हो, उसे छोड़ा नहीं जाना चाहिए। भगवान के दान में किसी का कोई अधिकार नहीं बनता है। यदि इसमें चोरी की गई है, तो यह महापाप है।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले से आए जगदीश प्रसाद ने कहा कि जबसे यह गबन का मामला सुना है, तबसे मन व्यथित है। दर्शन के दौरान रामलला से यही कामना की है कि जिसने भी धनराशि चुराई है, उसे दंड जरूर देना। प्रयागराज के सोरांव से परिवार के साथ आए संदीप पांडेय कहते हैं, इस घटना ने सभी रामभक्तों को शर्मसार कर दिया है।
लखनऊ के अलीगंज निवासी नवीन राय कहते हैं, यह महापाप करने वाले रामभक्त तो नहीं हो सकते। ऐसे लोगों को जांच के बाद मंदिर व ट्रस्ट से ही निकाल देना चाहिए और कड़ा दंड देकर सबक सिखाना होगा।
मध्य प्रदेश के जबलपुर से पूरे परिवार के साथ दर्शन के लिए आए पुष्पराज सिंह ने कहा कि इतने वर्षों बाद जब भगवान अपने धाम में विराजे तो सबका मन आह्लादित था। जबसे चढ़ावा चोरी की घटना सुनी है, मन विचलित है। मुझे पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री किसी को बख्शेंगे नहीं।






