लखनऊ अग्निकांड: आवासीय प्लॉट पर बना था कोचिंग सेंटर, जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद जांच तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे के कारणों की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं।
आवासीय प्लॉट पर चल रहा था व्यावसायिक संस्थान
जानकारी के अनुसार, अलीगंज सेक्टर-डी का यह क्षेत्र पूरी तरह आवासीय श्रेणी में आता है, जहां केवल मकान निर्माण की अनुमति है। संबंधित प्लॉट का आवासीय नक्शा वर्ष 2014 में स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2013 में वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला ने यह 1992 वर्गफुट का प्लॉट खरीदा था, लेकिन बाद में यहां नियमों के विपरीत एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित कर दिया गया।
निर्माण नियमों की हुई अनदेखी
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के नियमों के मुताबिक भवन के आगे और पीछे कम से कम तीन-तीन मीटर का सेटबैक छोड़ना अनिवार्य होता है। इसके अलावा भवन के बीच में खुला आंगन होना भी जरूरी है। वहीं किसी भी व्यावसायिक भवन में प्रवेश और निकास के लिए दो अलग-अलग रास्ते होने चाहिए, लेकिन इस इमारत में केवल एक ही रास्ता मौजूद था। स्थिति और गंभीर तब हो गई जब उसी रास्ते में एसी की आउटर यूनिट्स भी लगी हुई थीं, जिससे आपातकालीन निकासी प्रभावित हुई।
बताया जाता है कि वर्ष 2016 में इस भवन को अवैध घोषित किया गया था, लेकिन कुछ समय बाद दस्तावेजों में इसे वैध कर दिया गया।
बिजली और सुरक्षा व्यवस्था में भी लापरवाही
प्रारंभिक जांच में विद्युत व्यवस्था को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। भवन में निम्न गुणवत्ता के तार और अन्य बिजली उपकरण लगाए गए थे। जिस एनिमेशन सेंटर में आग लगी, उसके निकास द्वार पर बायोमेट्रिक सिस्टम लगा था, जबकि छत की ओर जाने वाला दरवाजा बंद था। ऐसे में आग लगने के दौरान लोगों के पास बाहर निकलने के सीमित विकल्प ही मौजूद थे।
हालांकि भवन की ऊंचाई 15 मीटर से कम होने के कारण फायर विभाग से एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य नहीं था, इसलिए फायर एनओसी नहीं ली गई थी।
एसआईटी ने किया घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण
मंगलवार को एसआईटी की टीम ने घटनास्थल का करीब 40 मिनट तक गहन निरीक्षण किया। टीम सबसे पहले एनिमेशन सेंटर पहुंची और वहां मौजूद निकास मार्गों का जायजा लिया। इसके बाद सीढ़ियों और वहां लगी एसी की आउटर यूनिट्स की स्थिति देखी गई। जांच टीम छत पर भी पहुंची, जिसका दरवाजा हादसे के समय बंद बताया जा रहा है। इसके अलावा भवन में संचालित PET सेंटर का भी निरीक्षण किया गया।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन लापरवाहियों और नियमों की अनदेखी के कारण यह भीषण हादसा हुआ, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई।






