ये हैं IAS सविता प्रधान, जो कभी अपने अंडर गारमेंट्स में रोटी छुपाकर चोरी-छिपे खाया करती थीं।
जब यह तैयार होकर एग्जाम देने जा रही थीं, तो इनके ऊपर पेशाब फेंका गया।
16 साल की उम्र में शादी… डॉक्टर बनने का सपना अधूरा… और फिर शुरू हुआ ऐसा संघर्ष जिसे सुनकर कोई भी हिम्मत हार जाए।
मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्मी सविता बेहद गरीब परिवार से थीं।
स्कूल 7–8 किलोमीटर दूर था और कई बार ₹2 किराया भी नहीं होता था, इसलिए पैदल ही पढ़ने जाती थीं।
दसवीं पास करने वाली वह अपने गाँव की पहली लड़की बनीं।
शादी से पहले ससुराल वालों ने पढ़ाई जारी रखने का वादा किया, लेकिन शादी के बाद सब बदल गया।
दो बच्चों की माँ बनने के बाद भी उन पर लगातार अत्याचार होता रहा।
फिर एक दिन, जब वह परीक्षा देने के लिए तैयार हो रही थीं, उनके साथ ऐसा हुआ जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता…
इतना सब सहने के बाद भी सविता ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। वह अपने दोनों बच्चों के साथ अलग रहने लगीं।
खर्च चलाने के लिए पार्लर में काम किया, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और हर मुश्किल के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी।
उन्होंने बताया कि एक बार परीक्षा देने से पहले उनके पति ने उनके साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया। इसके बावजूद उन्होंने कपड़े बदले और परीक्षा देने चली गईं।
साल 2017 में सविता ने UPSC की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू पास कर उन्होंने IAS बनने का सपना पूरा कर दिखाया।
उनकी कहानी यही सिखाती है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला नहीं टूटे तो मंज़िल तक पहुँचना संभव है।
सविता ने हर मुश्किल को मात देकर जो हिम्मत दिखाई, वो सभी के लिए मिसाल है। ऐसी कहानियाँ हमें बताती हैं कि संघर्ष के बावजूद बदलाव मुमकिन है।
ऐसी प्रेरक कहानियाँ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और दूसरों को कभी हार न मानने की बेहद मजबूत और सच्ची सीख देती हैं।






