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ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मामलों को विशेष लोक अदालत भेजा

ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने सुलह की दिशा में बढ़ाया कदम, विशेष लोक अदालत में होगी सुनवाई

देश के तीन सबसे चर्चित धार्मिक विवाद—वाराणसी का ज्ञानवापी मस्जिद मामला, मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल का हरिहर मंदिर-जामा मस्जिद विवाद—अब अदालत के बाहर बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में बढ़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को ‘समाधान समारोह’ के तहत आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत में भेजने का निर्णय लिया है।

यह विशेष लोक अदालत 21 से 23 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित होगी। इसका उद्देश्य वर्षों से लंबित धार्मिक विवादों का समाधान आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से तलाशना है। इस प्रक्रिया के तहत हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं।

लोक अदालत से पहले शुरू हुई सुलह प्रक्रिया

विशेष लोक अदालत से पहले मध्यस्थता की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। निचली अदालतों में 21 अप्रैल से सुलह के प्रयास जारी हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई को वाराणसी में ज्ञानवापी विवाद को लेकर प्री-मेडिएशन (सुलह-पूर्व) सुनवाई होगी।

वहीं, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में पहले की मध्यस्थता सफल नहीं हो सकी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को भी विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया।

क्या है ज्ञानवापी मस्जिद विवाद?

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि इसका निर्माण मुगल काल में मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर कराया गया था। याचिकाओं में मस्जिद परिसर के कुछ हिस्सों में पूजा-अर्चना की अनुमति देने और पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की वैधता व लागू होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति इन दावों का विरोध कर रही है। समिति का कहना है कि मस्जिद 1991 के कानून के तहत संरक्षित है और दायर याचिकाएं कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हैं। फिलहाल यह मामला विभिन्न अदालतों में लंबित है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद

मथुरा का यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब के शासनकाल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने विवादित भूमि पर अपना अधिकार जताते हुए मस्जिद हटाने और जमीन वापस देने की मांग की है। वहीं, शाही ईदगाह मस्जिद समिति इन दावों को खारिज करते हुए 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का हवाला दे रही है और मुकदमों की सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठा रही है।

संभल जामा मस्जिद विवाद

संभल का विवाद उस समय चर्चा में आया जब एक सिविल कोर्ट ने मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया। याचिका में दावा किया गया था कि मस्जिद वाली जगह पर पहले हरिहर मंदिर मौजूद था।

सर्वे के आदेश के बाद नवंबर 2025 में संभल में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए। यह मामला भी फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

ज्ञानवापी, मथुरा और संभल से जुड़े सभी मामले फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अदालत इन विवादों के साथ-साथ पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की संवैधानिक व्याख्या और उसके दायरे से जुड़े व्यापक कानूनी प्रश्नों पर भी सुनवाई कर रही है। ऐसे में अगस्त में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत इन संवेदनशील मामलों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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Author: sssrknews

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