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इंडोनेशिया ने भारत से खरीदी ₹2500 करोड़ की BrahMos और Astra मिसाइलें, चीन की बढ़ी टेंशन

इंडोनेशिया ने, #भारत से खरीदी ₹2500 करोड़ की Astra और BrahMos मिसाइलें.. चाइना की टेंशन बढ़ी, इंडोनेशिया से हुई ऐतिहासिक डील… जो कभी हथियार खरिदता था, आज बेच रहा है.

मित्रों, कल जकार्ता में जो हुआ है वो सिर्फ एक डील नहीं थी. वो भारत के नए भारत का ऐलान था. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हाथ मिलाकर Astra और BrahMos मिसाइल की डील साइन की, तो पूरी दुनिया ने देख लिया कि अब हथियार खरीदने वाला भारत नहीं, हथियार बेचने वाला भारत बन चुका है. चलिए मित्रों, मैं इस पोस्ट में आप लोगों को पॉइंट वाई पॉइंट समझाता हूँ, की यह डील भारत को कहां खड़ा कर सकता है.

1 = 2500 करोड़ की डील, लेकिन असली कीमत है भारतीय टेक्नोलॉजी पर इंडोनेशिया का “भरोसा”.

इंडोनेशिया ने भारत से करीब 630 मिलियन डॉलर यानी 2500 करोड़ रुपये की मिसाइलें खरीदी हैं. इसमें भारत की BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और Astra बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल शामिल हैं. यह डील साइन होते ही इंडोनेशिया दुनिया का तीसरा देश बन गया जिसके पास BrahMos है. पहला खरीददार फिलीपींस और वियतनाम थे. सोचिए 10 साल पहले हम रूस, इजरायल, अमेरिका से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदते थे. आज ASEAN के देश लाइन लगाकर हमारे दरवाजे पर खड़े हैं. यह बदलाव कैसे आया.? क्योंकि भारत ने “आत्मनिर्भर भारत” को एक नारा नहीं, बल्कि हकीकत के रूप में दुनिया के सामने खड़ा कर दिया है.

2 = BrahMos क्या है कि पूरी दुनिया दीवानी है.

BrahMos दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक है. स्पीड: 3 Mach है, यानी कि आवाज से तीन गुना तेज. इसे जमीन से, समुद्र से, हवा से, पनडुब्बी से कहीं से भी दागा जा सकता है. रेंज 400 से 500 किलोमीटर तक. लेकिन भारत ने जो बेचा है, उसकी रेंज 300 किलोमीटर तक है. यह भारत-रूस का जॉइंट प्रोडक्ट है, लेकिन अब 78 प्रतिशत से ज्यादा पार्ट्स भारत में ही बनते हैं. लखनऊ में नया इंटीग्रेशन सेंटर खुल चुका है. पाकिस्तान के साथ 4 दिन के संघर्ष में जब पहली बार BrahMos का इस्तेमाल हुआ, तब पूरी दुनिया ने इसकी ताकत देखी थी. उसके बाद से 6 से ज्यादा देश अब लाइन में लगे हैं खरीदने के लिए. इंडोनेशिया ने खास तौर पर नेवल और एयर लॉन्च वर्जन मांगा है अपने सुखोई जेट्स के लिए. मतलब इंडोनेशियन पायलट अब भारतीय मिसाइल से उड़ान भरेंगे.

3 = Astra मिसाइल को लेकर दुनिया बैचेन हो रही है.

BrahMos के साथ भारत ने Astra मिसाइल भी दी है. यह 110 किलोमीटर दूर से दुश्मन के फाइटर जेट को गिराने वाली मिसाइल है. इसे DRDO ने बनाया है. पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है. अब इंडोनेशिया के सुखोई Su-30 पर Astra लगेगी. सोचिए, रूस का जहाज, भारत की मिसाइले लगी हुई हैं. यह है भारत की टेक्नोलॉजी की ताकत. Bharat Dynamics जैसी भारतीय कंपनी अब इंडोनेशिया की कंपनी के साथ मिलकर काम करेगी. यह सिर्फ बिक्री नहीं, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी है.

4 = ASEAN में भारत का डंका क्यों बज रहा है.

इंडोनेशिया ASEAN का सबसे बड़ा देश है. 27 करोड़ की आबादी. दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ बढ़ रही है. जब इंडोनेशिया भारत पर भरोसा करता है, तो मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम सब देखते हैं. यह डील सिर्फ पैसों की नहीं है. यह “इंडो-पैसिफिक” में चीन को सीधा संदेश है, कि इस इलाके में अब भारत भी गारंटर है. पिछले 12 साल में भारत ने पड़ोसियों को मदद की, कोविड में वैक्सीन दी, अब हथियार दे रहा है. यही “नेबरहुड फर्स्ट” और “सागर” नीति का असर है.

5= मेक इन इंडिया का असली फायदा किसे होगा.

इस डील से सिर्फ सरकार को पैसा नहीं आएगा. HAL, Data Patterns, Paras Defence, Premier Explosives, PTC Industries जैसी 200 से ज्यादा MSME कंपनियों को ऑर्डर मिलेगा. क्योंकि BrahMos के हर पुर्जे में भारतीय सप्लायर का हाथ है. यानी इंडोनेशिया को मिसाइल मिलेगी, और भारत के इंजीनियर, कारीगर, वैज्ञानिक को रोजगार. मानो पहले हम 2500 करोड़ के हथियार खरीदते थे, आज 2500 करोड़ के हथियार बेच रहे हैं. यही है असली आत्मनिर्भरता.

6 = साबांग पोर्ट: भारत के लिए गेम चेंजर.

डील के साथ भारत और इंडोनेशिया ने साबांग पोर्ट को मिलकर डेवलप करने का भी फैसला किया. यह पोर्ट कहां है.? मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर. दुनिया का 40 प्रतिशत शिपिंग इसी रास्ते से गुजरता है. अगर भारत का इस पोर्ट पर असर बढ़ता है, तो चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति का जवाब तैयार है. यानी मिसाइल भी बेची और रणनीतिक जगह पर पैर भी जमा लिया, इसे कहते हैं कूटनीति.

7 = हमारे विपक्षी दलों वर्तमान की हालात देखें तो, वे भी इंडोनेशिया से पूछ सकते हैं कि, इतनी महंगी सामना भारत से क्यूं खरीद रहे हो.!?

उन्हें बता दो: एक BrahMos मिसाइल 3 करोड़ की पड़ती है, लेकिन यह मिसाइल 100 करोड़ के दुश्मन के जहाज को डुबो देती है. और सबसे बड़ी बात: यह पैसा भारत में ही घूमेगा. टैक्स, नौकरी, एक्सपोर्ट, सब भारत को मिलेगा. हम 10 हजार करोड़ के राफेल खरीद सकते हैं तो, आज 2500 करोड़ का BrahMos बेच सकते हैं. हिसाब साफ है.

8 = निष्कर्ष: यह नया भारत है.

1962 में हम चीन से हार गए थे क्योंकि हमारे पास उतना हथियार और साहस नहीं थे. 1999 में कारगिल में हमें दुसरे देशों से गोले मांगने पड़ते थे. 2020 में गलवान के बाद हमने कहा “अब और नहीं”. और 2026 में इंडोनेशिया हमारे दरवाजे पर आकर बोल रहा है “हमें आपकी मिसाइल चाहिए”. यह बदलाव एक दिन में नहीं आया. 12 साल की मेहनत, DRDO के वैज्ञानिकों का पसीना, सेना का भरोसा और एक मजबूत नेतृत्व का नतीजा है. आज जब इंडोनेशिया के जवान BrahMos चलाएंगे, तो बटन के पीछे भारत का दिमाग होगा. आज जब ASEAN की मीटिंग होगी, तो भारत की बात वजन रखेगी. आज जब दुनिया का नक्शा बनेगा, तो भारत “हथियार निर्यातक” के रूप में लिखा जाएगा. यह सिर्फ डील नहीं है भाई, यह 140 करोड़ भारतीयों का गर्व है….

🇮🇳🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳

साभार आनन्द मिश्रा जी

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