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सरकार-CJP नेताओं की वार्ता खत्म, प्रदर्शनकारियों ने रखीं 5 लिखित मांगें

सरकार और CJP के बीच अहम बैठक, प्रदर्शनकारियों ने रखीं 5 लिखित मांगें; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों, जिनमें नीट परीक्षा से जुड़े विषय भी शामिल हैं, पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। वहीं, प्रदर्शन को लेकर समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई।

केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में करीब डेढ़ घंटे तक चली। CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार को पांच पैराग्राफ का लिखित मांगपत्र सौंपा और अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा।

CJP की प्रमुख मांगों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार से सार्वजनिक माफी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा शामिल है। संगठन का कहना है कि इन मांगों पर ठोस कार्रवाई के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

बैठक से पहले सरकार ने CJP को जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन संगठन ने किसी तटस्थ स्थान पर चर्चा की मांग की। सरकार ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक आयोजित हुई। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है और जल्द किसी समाधान पर सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि, CJP ने साफ कर दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। संगठन के नेता अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री पद नहीं छोड़ते, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। इसी बीच सरकार पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून में मामलों का तीन महीने के भीतर निपटारा, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है।

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