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क्यों हमेशा बंद रहता है कन्याकुमारी मंदिर का समुद्री द्वार? जानिए चमत्कारी रहस्य

कन्याकुमारी मंदिर के समुद्री द्वार को बंद रखने के पीछे की कहानी बड़ी ही रोचक और चमत्कारिक है। यह कहानी देवी की उस दिव्य नथ से जुड़ी है, जिसकी चमक आज भी पूरी दुनिया में मशहूर है।

कहा जाता है कि माता कन्याकुमारी की प्रतिमा की नाक में जड़ी हीरे की नथ बहुत ही अलौकिक है। प्राचीन काल में जब लाइटहाउस (प्रकाश स्तंभ) नहीं होते थे, तब समुद्र में चलने वाले जहाजों के लिए यह नथ ही मार्गदर्शक का काम करती थी।

मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में समुद्र की ओर खुलता था। हीरे की चमक इतनी तेज और चमकदार थी कि रात के अंधेरे में समुद्र के बीच से आने वाले नाविकों को लगता था कि वह किसी टापू या किनारे का लाइटहाउस है।

इस भ्रम के कारण कई जहाज किनारे की ओर तेजी से आते और तट की नुकीली चट्टानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे।

समुद्री जहाजों को इन हादसों से बचाने के लिए मंदिर के उस पूर्वी द्वार को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। अब देवी की प्रतिमा का दर्शन केवल उत्तरी द्वार से ही होता है। साल में केवल कुछ विशेष अवसरों (जैसे कि आराट्टु उत्सव) पर ही इस द्वार को खोला जाता है।

इस मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को कमर से ऊपर के वस्त्र उतारने होते हैं, जो दक्षिण भारतीय मंदिरों की एक पवित्र परंपरा है।

यदि आप देवी की प्रतिमा को ध्यान से देखेंगे, तो उनके हाथ में एक माला है। वह आज भी भगवान शिव के साथ विवाह की प्रतीक्षा में ‘तपस्या’ की मुद्रा में खड़ी हैं।

कन्याकुमारी दुनिया की उन दुर्लभ जगहों में से एक है जहाँ आप एक ही स्थान पर खड़े होकर समुद्र से सूर्योदय होते हुए और समुद्र में ही सूर्यास्त होते हुए देख सकते हैं। विशेष रूप से चैत्र पूर्णिमा के दिन, आप एक तरफ सूरज को ढलते और दूसरी तरफ चांद को निकलते हुए देख सकते हैं।

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