वन नेशन-वन इलेक्शन पर शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान, बोले- बार-बार चुनाव विकास की राह में बाधा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संतों की बैठक के दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ यानी वन नेशन-वन इलेक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से विकास और जनसेवा की गति प्रभावित होती है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में एक साथ चुनाव कराना जरूरी है। इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मंच पर मौजूद रहे और उन्होंने भी इस पहल का समर्थन किया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बड़ी मात्रा खर्च होती है। इसका सीधा असर विकास कार्यों और जनसेवा की गति पर पड़ता है। उन्होंने संत समाज से वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की अपील भी की।
वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर बढ़ी हलचल
हरिद्वार में संत समाज के समागम में वन नेशन-वन इलेक्शन के समर्थन में संकल्प लिए जाने के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच ऐसी चर्चाएं भी सामने आई हैं कि केंद्र सरकार 2034 के बजाय 2029 में ही लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि, इसे लेकर अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
किन राज्यों में बदल सकता है चुनावी चक्र?
अगर 2029 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने की योजना आगे बढ़ती है, तो कई राज्यों के मौजूदा चुनावी चक्र में बदलाव करना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश, गोवा, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों का चुनावी कार्यकाल 2029 के चक्र के साथ मिलाने के लिए संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर बदलाव की जरूरत होगी।
वहीं कर्नाटक, तेलंगाना, मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा में 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में भी चुनावी चक्र को लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ने के लिए कार्यकाल में बदलाव करना पड़ सकता है।
आजादी के बाद एक साथ होते थे चुनाव
भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना कोई नया विचार नहीं है। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और अधिकांश विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे।
‘इच्छाशक्ति हो तो सब कुछ संभव’
वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक भी जारी है। बैठक में कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी, पी. चिदंबरम और रणदीप सुरजेवाला समेत कई सदस्य मौजूद हैं। एनसीपी (शरद गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी बैठक में शामिल होने पहुंचीं।
बैठक से पहले JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि इच्छाशक्ति हो तो सब कुछ संभव है। सरकार का कहना है कि वन नेशन-वन इलेक्शन का उद्देश्य केवल चुनावों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है।
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