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सुकमा में ग्राम सभा का प्रस्ताव: चर्च निर्माण और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन देने पर रोक

॥श्री राज श्यामा जी सदा सहाय॥

पुनपल्ली में 2 अक्टूबर को हुई विशेष ग्राम सभा में 12 प्रस्ताव पारित; PESA और पांचवीं अनुसूची का दिया गया हवाला

सुकमा, छत्तीसगढ़ | ePortal News

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा जनपद पंचायत क्षेत्र में स्थित पुनपल्ली ग्राम पंचायत में 2 अक्टूबर को आयोजित विशेष ग्राम सभा में पारित एक प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद कुल 12 प्रस्ताव पारित किए गए।

इनमें से एक प्रस्ताव में ईसाई समुदाय और धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के लिए चर्च निर्माण, प्रार्थना एवं धार्मिक सभाओं के आयोजन तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक भूमि उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई है।

📍 क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुनपल्ली ग्राम पंचायत में आयोजित विशेष ग्राम सभा में गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक भूमि के इस्तेमाल से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव में धार्मिक गतिविधियों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत भवन के सूचना-पटल पर एक सूचना भी लगाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य धार्मिक गतिविधियों के संबंध में बाहरी धार्मिक प्रचारकों एवं पादरियों के गांव में प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है।

हालांकि, इन प्रतिबंधों की कानूनी वैधता और इन्हें लागू करने की सीमा का निर्धारण संबंधित प्रशासनिक एवं वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा किया जाना है।

⚖️ ग्राम सभा ने किन कानूनों का दिया हवाला?

ग्राम सभा ने अपने प्रस्ताव के समर्थन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA Act, 1996 और छत्तीसगढ़ PESA कानून, 2022 का हवाला दिया है।

ग्राम सभा का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान, स्थानीय रीति-रिवाज और सामुदायिक हितों के संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है।

वहीं, यह महत्वपूर्ण है कि PESA के तहत ग्राम सभा की शक्तियों और धार्मिक गतिविधियों पर इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने के अधिकार की कानूनी सीमा का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारियों की व्याख्या पर निर्भर करेगा।

🗣️ जनपद सदस्य ने क्या कहा?

कोंटा जनपद पंचायत के सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े नेता मड़कम भीमा के अनुसार, पुनपल्ली में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई थी, जिसमें स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा हुई।

उन्होंने बताया कि ग्राम सभा ने सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव पारित किया है।

📌 बस्तर क्षेत्र में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

बस्तर और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों और स्थानीय पारंपरिक व्यवस्थाओं से जुड़े ऐसे विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • मार्च 2023: बस्तर के रानसरगीपाल में ग्राम सभा से जुड़ा धार्मिक गतिविधियों पर नियंत्रण का प्रस्ताव सामने आया था।
  • फरवरी 2024: छिंदवाड़ा में अंतिम संस्कार से संबंधित ग्राम सभा के प्रस्ताव की खबर सामने आई थी।
  • जनवरी 2025: एक ईसाई परिवार से जुड़े अंतिम संस्कार के मामले ने सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच बनाई थी।
  • फरवरी 2026: पादरियों के प्रवेश पर रोक से संबंधित बोर्डों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए संबंधित पक्षों को वैधानिक प्राधिकारी के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी थी।
  • जून 2026: कांकेर जिले में कई ग्राम सभाओं की संयुक्त बैठक के दौरान भी इसी तरह के प्रस्ताव की रिपोर्ट सामने आई थी।

इन मामलों में स्थानीय परंपराओं, आदिवासी स्वायत्तता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के बीच संतुलन को लेकर बहस होती रही है।

🏛️ अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण

पुनपल्ली ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद अब प्रशासन के सामने यह महत्वपूर्ण प्रश्न है कि PESA और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के तहत ग्राम सभा को धार्मिक गतिविधियों, सामुदायिक भूमि और गांव में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश के संबंध में कितनी वैधानिक शक्ति प्राप्त है।

प्रस्ताव की कानूनी वैधता और उसके क्रियान्वयन की सीमा का परीक्षण संबंधित प्रशासनिक एवं वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।

मामले में सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

📰 ePortal News की अपील

ePortal News का उद्देश्य इस मामले से जुड़ी जानकारी को तथ्यात्मक और निष्पक्ष रूप से पाठकों तक पहुंचाना है। किसी भी समुदाय के प्रति भेदभाव या नफरत का समर्थन नहीं किया जाता।

धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी परंपराओं, सामुदायिक अधिकारों और स्थानीय स्वशासन से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान भारतीय संविधान और लागू कानूनों के दायरे में होना चाहिए।

स्थान: पुनपल्ली ग्राम पंचायत, कोंटा, जिला सुकमा, छत्तीसगढ़
रिपोर्ट: ePortalNews.in — निष्पक्ष • विश्वसनीय • तथ्य आधारित

Source: एजेंसी एवं उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर

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Author: sssrknews

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