कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार को जाति जनगणना के मुद्दे पर घेरा है। कांग्रेस अधिवेशन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर जातिगत जनगणना कराने से इनकार कर दिया है। राहुल गांधी ने इस निर्णय को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया और कहा कि यह देश की बड़ी आबादी के हक और अधिकारों को नजरअंदाज करने जैसा है।
जाति जनगणना क्या है और क्यों है जरूरी?
जाति जनगणना का उद्देश्य देश में विभिन्न जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझना है। इससे यह पता चल सकता है कि कौन-सी जातियां अब भी पिछड़ेपन का शिकार हैं और किन्हें सरकारी योजनाओं व आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।
राहुल गांधी का मानना है कि अगर सरकार सही आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाए, तो देश में समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा:
“प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जातिगत जनगणना नहीं कराएंगे। इससे यह साफ होता है कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत को गंभीरता से नहीं लेती।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना के पक्ष में है और अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो वे इसे प्राथमिकता से कराएंगे।
राजनीतिक महत्व और विपक्ष की मांग
जाति जनगणना को लेकर केवल कांग्रेस ही नहीं, कई अन्य विपक्षी दल भी लंबे समय से मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 1931 के बाद से जातिगत आंकड़े नहीं जुटाए गए हैं, जबकि आज भी सामाजिक-आर्थिक असमानता जाति के आधार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
सरकार की दलील
सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि जाति जनगणना से सामाजिक ताना-बाना बिगड़ सकता है और यह एक जटिल प्रक्रिया है, जिससे नीतिगत भ्रम भी उत्पन्न हो सकते हैं।







