कांग्रेस ने हमें दी अभिव्यक्ति की शक्ति, यही सबसे बड़ी ताकत है: डी.के. शिवकुमार
बेंगलुरु: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कांग्रेस की विचारधारा और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो सबसे बड़ी ताकत दी है, वह है “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता”। उन्होंने यह टिप्पणी एक स्वागत समारोह के दौरान की, जहां कांग्रेस में शामिल होने वाले नए नेताओं का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में शिवकुमार ने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान और उसके नेताओं के बलिदान को याद करते हुए कहा, “कांग्रेस की ताकत ही देश की ताकत है। यह केवल राजनीतिक दल नहीं, बल्कि देश के इतिहास का अहम हिस्सा है। क्या भारत के इतिहास को मिटाया जा सकता है?”
“पद नहीं, अभिव्यक्ति की शक्ति महत्वपूर्ण”
शिवकुमार ने कहा, “पार्टी ने मुझे क्या पद दिए — सदस्य, अध्यक्ष, मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यपाल — यह मायने नहीं रखता। असली महत्व इस बात का है कि कांग्रेस ने हमें अपने विचार रखने और बोलने की शक्ति दी है।” उन्होंने दावा किया कि देश की किसी और राजनीतिक पार्टी में वह स्वतंत्रता नहीं है जो कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को देती है।
मुख्यमंत्री पद को लेकर बयान के राजनीतिक मायने
शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में साफ किया कि राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बदलाव नहीं होने वाला है। सिद्धारमैया ने कहा था कि वे अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर दिया था।
“गांधी-नेहरू परिवार ने देश और पार्टी के लिए दिया सब कुछ”
शिवकुमार ने गांधी-नेहरू परिवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि कांग्रेस ने न केवल देश को आज़ादी दिलाई, बल्कि उसे संविधान भी दिया। “पूरी दुनिया आज भारतीय लोकतंत्र और संविधान की सराहना करती है। यह वही संविधान है जिसे कांग्रेस ने बनाया और संरक्षित किया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। “नेहरू परिवार ने अपनी पूरी संपत्ति कांग्रेस के लिए कुर्बान कर दी, यह त्याग किसी दूसरी पार्टी में नहीं देखा गया है,” उन्होंने जोड़ा।
“सोनिया गांधी ने सत्ता ठुकराई, राहुल प्रधानमंत्री बन सकते थे”
शिवकुमार ने यूपीए सरकार के समय की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने सत्ता को ठुकरा दिया। “एक ईसाई महिला ने इस देश को अपनाया, संविधान को अपनाया और यहां की संस्कृति का सम्मान किया। उन्होंने एक सिख अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया, जो 10 वर्षों तक देश का नेतृत्व करते रहे,” उन्होंने कहा।
“हम भी हिंदू हैं, लेकिन सबको साथ लेकर चलते हैं”
कर्नाटक में बीजेपी के हिंदू समर्थक रुख पर निशाना साधते हुए शिवकुमार ने कहा, “हम भी शिव, गणेश और राम की पूजा करते हैं। लेकिन हम सबको साथ लेकर चलते हैं। भाजपा सिर्फ हिंदुओं की बात करती है, जबकि कांग्रेस मानवता की बात करती है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति “सबका साथ, सबका विकास” की है, जबकि बीजेपी एक सीमित वर्ग की राजनीति करती है। शिवकुमार ने कांग्रेस की विचारधारा को समावेशी बताया और कहा कि पार्टी सभी धर्मों और समुदायों को समान दृष्टि से देखती है।
इस पूरे कार्यक्रम में शिवकुमार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं करती, बल्कि यह देश के लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए खड़ी रही है। उनका यह बयान न सिर्फ पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को स्पष्ट करने का प्रयास था, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती से सामने लाने की रणनीति का भी संकेत है।






