कांग्रेस की बैठक में सख्त संदेश: “मध्य प्रदेश जैसी गलती न दोहराएं”
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत सोमवार को दिल्ली में मध्य प्रदेश, उड़ीसा, पंजाब, झारखंड और उत्तराखंड के नेताओं की अहम बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे। बैठक के दौरान केंद्रीय नेतृत्व ने साफ तौर पर राज्यों को नसीहत दी कि वे मध्य प्रदेश जैसी गलतियों को दोहराने से बचें।
बैठक में क्यों दिखी नाराज़गी?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व मध्य प्रदेश इकाई से जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर बेहद नाराज़ है। आरोप है कि राज्य में कई जिलों में गलत तरीके से नियुक्तियां की गईं—
-
कई जिलों में बाहरी व्यक्ति को जिला अध्यक्ष बना दिया गया।
-
कुछ जिलों में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई जिनकी छवि विवादित है।
-
परंपरा रही है कि आरक्षित विधानसभा/लोकसभा क्षेत्रों में सामान्य वर्ग से जिला अध्यक्ष नियुक्त होता था, लेकिन इस बार उस नियम का पालन भी नहीं किया गया।
राहुल गांधी की नसीहत
बैठक में राहुल गांधी ने सभी राज्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले दिनों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पारदर्शिता और स्थानीय संतुलन के साथ की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि “मध्य प्रदेश जैसी गड़बड़ियां अन्य राज्यों में नहीं होनी चाहिए।”
किन राज्यों की नियुक्तियों से संतुष्ट है आलाकमान?
जहां एक ओर मध्य प्रदेश की कार्यशैली पर नाराज़गी जताई गई, वहीं कांग्रेस नेतृत्व ने हरियाणा और गुजरात में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर संतोष जाहिर किया।
मध्य प्रदेश में विवाद क्यों भड़का?
-
खंडवा में जिला अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी को नियुक्त किया गया, जबकि वे गुना की रहने वाली हैं।
-
इंदौर शहर के अध्यक्ष पद पर इंदौर ग्रामीण के व्यक्ति को बिठा दिया गया।
-
भोपाल, उज्जैन, देवास, इंदौर समेत कई जिलों में नियुक्तियों को लेकर भारी असंतोष है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस आलाकमान ने साफ कर दिया है कि जिला स्तर पर की गई गड़बड़ नियुक्तियां संगठन को कमजोर करती हैं और ऐसे कदम दोबारा बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।






