तोक्यो में पीएम मोदी और जापानी गवर्नरों की मुलाकात, अमेरिका तक बढ़ी बेचैनी
अमेरिका के साथ टैरिफ और ट्रेड वॉर के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जापान दौरा वाशिंगटन तक हलचल मचा गया है। जापान के साथ होने वाली हर व्यापारिक डील और समझौते पर अमेरिका की नज़र टिकी हुई है। भारत, अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए जापान जैसे साझेदारों के साथ नए विकल्प तलाश रहा है।
शनिवार को तोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत राज्य-प्रांत सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया। इस पहल से अमेरिका भी चौकन्ना हो गया है।
अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ टकराव और “56 इंच का दम”
अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड विवाद के बीच जापानी गवर्नरों के साथ पीएम मोदी की ये बैठक भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। चीन, ब्रिक्स देशों, एशिया, अफ्रीका और अरब बाज़ारों में नए अवसर तलाशने की मोदी सरकार की कोशिशें अमेरिका के लिए चिंता का सबब बन रही हैं। वाशिंगटन को अब यह समझ आने लगा है कि मोदी झुकने वाले नहीं, बल्कि संकट में अवसर तलाशने वाले नेता हैं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा—
“तोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मित्रता का एक अहम स्तंभ है। व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।”
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि बातचीत में दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, निवेश, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और MSME सेक्टर में गहरी साझेदारी पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने जोर दिया कि भारत-जापान संबंध सिर्फ़ दिल्ली और तोक्यो तक सीमित न रहकर अब राज्यों और प्रांतों तक गहराने चाहिए।
भारत-जापान सहयोग के नए आयाम
मोदी ने जापानी गवर्नरों और भारतीय राज्यों से विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों में साझेदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जापानी प्रांतों की अपनी तकनीकी ताकत है और भारतीय राज्यों की अपनी क्षमताएं, इन्हें मिलाकर दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।
जापानी गवर्नरों ने भी माना कि द्विपक्षीय व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को मजबूत बनाने में राज्य-प्रांत सहयोग बेहद अहम होगा।






