इंदौर के अनिल जायसवाल ने वो कर दिखाया है जिसे लोग सिर्फ़ पहाड़ों और कश्मीर की ठंडी घाटियों तक ही सीमित मानते थे। न कोई बड़ा खेत, न ही खेती का कोई अनुभव – फिर भी सिर्फ़ 320 वर्ग फुट के एक कमरे में उन्होंने केसर जैसी कीमती फसल उगाकर सबको चौंका दिया!
जहाँ दूसरे लोग ठंड, उमस और रोशनी की कमी के कारण हार मान लेते, वहीं अनिल ने अपने घर के एक कमरे को हाई-टेक लैब में बदल दिया। हर डिग्री तापमान पर ध्यान, नमी की हर बूँद पर नज़र – और कुछ ही समय में फसल उग आई जिसकी बाज़ार में कीमत 8 लाख रुपये प्रति किलो है।
अब लोग दूर-दूर तक पूछते हैं, “क्या ये वाकई मुमकिन है?” और जवाब है – बिल्कुल मुमकिन है, अगर सोच खेत से बड़ी हो! अनिल जायसवाल अब सिर्फ़ एक इंसान नहीं, बल्कि एक मिसाल हैं जो साबित करता है कि क्रांति मिट्टी से नहीं, सोच से होती है।






