देश की राजधानी दिल्ली की गलियों में एक बार फिर खौफ का साया मंडरा रहा है। यह डर बारिश का नहीं, बल्कि यमुना नदी का है, जो इस शहर की जीवनरेखा मानी जाती है। फिलहाल यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है। भारी बारिश और हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। नतीजतन, दिल्ली के कई निचले इलाकों में जलभराव होने लगा है। आसमान से गिरती बूंदें अब राहत नहीं, बल्कि डर का कारण बन गई हैं—क्योंकि दिल्लीवासियों की यादों में अभी भी 2023 की वो तबाही ताज़ा है, जब यमुना ने राजधानी को अपने पानी में डुबो दिया था।
2023 की भयावह बाढ़
आज भी कई परिवारों की आंखों में वो खौफनाक रात तैरती है, जब घरों में 8-8 फुट तक पानी भर गया था। सड़कों पर नावें चल रही थीं और घरों का सामान पानी में बह रहा था। लोग छतों पर खड़े होकर लाचार निगाहों से अपने आशियाने को डूबते हुए देख रहे थे। उस साल यमुना का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंचा था, जो एक रिकॉर्ड था। वो बाढ़ नहीं, बल्कि दिल्ली के लिए एक जल प्रलय थी।
1978 की त्रासदी
यमुना के इस कहर की गवाही 1978 भी देता है। 5-6 सितंबर को नदी ने अपनी सीमाएं लांघ दी थीं और जलस्तर 207.49 मीटर तक पहुंच गया था। मॉडल टाउन, मुखर्जी नगर जैसे इलाके पानी में डूब गए थे। उस बाढ़ ने 18 जिंदगियां निगल ली थीं और हजारों लोग बेघर हो गए थे।
आज जब यमुना का जलस्तर फिर से खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर रहा है, तो दिल्लीवालों की धड़कनें तेज हो रही हैं। प्रशासन की ओर से लगातार अलर्ट और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।






