मोदी ब्रांड की धमक को समझना है, तो दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में मिली उस जीत की गूंज को सुनिए…
बिहार में ऐतिहासिक विजय के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर आए, तो भीड़ केवल ताली नहीं बजा रही थी—भीड़ भविष्य सुन रही थी।
और तभी उन्होंने एक लाइन बोली, एक लाइन… जिसने राजनीति के बोर्ड पर अगली चाल लिख दी—
“बिहार से निकली यह गंगा… अब समुद्र से मिलने बंगाल की ओर बढ़ चली है।”
बस! जिसने इस वाक्य का मर्म पकड़ लिया, वो खिलाड़ी है…
और जो नहीं पकड़ पाया, वो राजनीति में सिर्फ ट्रैफिक देख रहा है।
???? अब ज़रा सुनिए असली कहानी— राजनीति का गणित, भूगोल और रसायन कैसे काम करता है…
बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र—
छह-छह किले फतह करने के बाद
बीजेपी की गाड़ी अब फुल स्पीड में बंगाल की तरफ दौड़ रही है।
और यह कोई भावनात्मक दौड़ नहीं है— यह है संगठन की विज्ञान आधारित योजना। बिहार की गली-गली में घूम चुकी आरएसएस की साइलेंट टीमें अब बिना रुके सीधे बंगाल की धरती पर उतर रही हैं। किसी टीवी कैमरे से दूर…
किसी शोर-शराबे से परे… बस चुपचाप, जैसे तूफान से पहले की शांति।
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⏳ जनवरी आते-आते नज़ारा देखिए—
भाजपा और एनडीए शासित राज्यों से सैकड़ों विधायक, संगठन मंत्री, बूथ टीम —बंगाल की गलियों और मोहल्लों में दिखाई देने लगेंगे। दरवाज़े खटखटाए जाएंगे…लोगों से बातें होंगी…घरों में चाय पी जाएगी… और वहीं बैठकर बूथ का नक्शा बदल दिया जाएगा। यह कोई अभियान नहीं—यह है राजनीतिक इंजीनियरिंग की पराकाष्ठा।
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????️ दिल्ली मुख्यालय में क्या चल रहा है?
नक्शे खुले हैं…रंगों से चिह्नित सीटें…किस जाति पर कौन प्रभाव रखता है, कौन-सी मंडली किस मोहल्ले को प्रभावित करती है,
किस जगह कौन-सा मुद्दा किस तरह समझाना है—
सबकुछ बार-बार ड्रिल हो रहा है। यानी ये सिर्फ राजनीति नहीं,
ये है गणित + भौतिकी + रसायन = सोशल इंजीनियरिंग।
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⚙️ और इस मशीन को धार कौन देता है?
अमित शाह और उनकी टीम। जिसे राजनीति की भाषा में
“दिमाग और दम का मिश्रण” पार्टी में कुछ लोग इन्हें चाणक्य भी कहते हैं ।
बंगाल में कभी 0 थे, फिर 88 तक पहुँचे। और अब लक्ष्य है—
88 से छलांग लगाकर 188 तक पहुंचने का।
ये आसान नहीं है! इसके लिए…पसीना भी बहाना पड़ता है,
रातें भी निगलनी पड़ती हैं, और हां… कभी-कभी दिल भी जलाना पड़ता है, साहब।
क्योंकि विजय किसी ठंडी कुर्सी पर नहीं मिलती—वो मिलती है
या तो रणभूमि मेंया फिर कागज़ पर बनाए उस प्लान में जो पूरे राज्य का भविष्य बदल दे।
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???? बंगाल… तैयार हो जाओ
बिहार की गंगा अब सिर्फ बहने नहीं आई—वो धारा लेकर आई है,लहर लेकर आई है, और इस बार लक्ष्य सिर्फ चुनाव नहीं…
बल्कि राजनीतिक भूचाल है।
जिस दिन यह गंगा बंगाल की धरती से टकराएगी, कहानी बदल जाएगी, नक्शा बदल जाएगा,
और इतिहास… एक नई लाइन लिख देगा।
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अगर आप राजनीति समझते हैं, तो ये सिर्फ पोस्ट नहीं—
एक आगामी अध्याय का प्रास्तावना है।
जो समझ गया वो खिलाड़ी… जो नहीं समझा, वो दर्शक बनकर ताली ही बजाता रह जाएगा।
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