मोदी विरोधी कौन
पुणे के योगेश शिंदे एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में 14 सालों तक नौकरी की है और अंत के 4 वर्षों में वह अपनी कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट थे
उनकी पोस्टिंग अमेरिका जर्मनी ब्रिटेन तमाम देशों में रही… 14 वर्ष नौकरी करने के बाद उन्होंने जब नरेंद्र मोदी जी को यह घोषणा करते सुना अब हमने बांस को पेड़ की श्रेणी से हटाकर घास की श्रेणी में ला दिया है यानी अब बांस उगाने काटने या बांस के ट्रांसपोर्टेशन के लिए किसी भी विभाग की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी तब उन्होंने विश्व में बढ़ रहे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए बांस से कई प्रोडक्ट बनाने की सोची
फिर उन्होंने नौकरी छोड़ी और अपने शहर पुणे आ गए उन्होंने एक स्टार्टअप कंपनी खोली जिसका नाम रखा बंबू इंडिया
हालांकि जब उन्होंने नौकरी छोड़ी तब उनके बच्चे पढ़ रहे थे और उनके ऊपर होम लोन भी था फिर भी योगेश शिंदे कहते हैं कि मुझे खुद पर विश्वास था
उन्होंने खेत लेकर नर्सरी बनाई और उसमें बांस उगाए उसके बाद उन्होंने उस बांस से तमाम प्रोडक्ट बनाना शुरू किया देखते ही देखते उनके प्रोडक्ट काफी हिट हो गए और कई देशों से डिमांड आने लगी
फिर एक दिन वह टूथब्रश कर रहे थे तो उन्हें लगा टूथब्रश खराब हो गया है और उस को डस्टबिन में डालने गए तब उन्हें यह महसूस हुआ कि हर कुछ महीनों में टूथब्रश खराब हो जाता है उसके बाद उन्होंने रिसर्च किया तो पता चला कि प्लास्टिक कैरी बैग के टूथब्रश दूसरा प्रोडक्ट है जो सबसे ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण फैलाता है तब उन्होंने बांस से टूथब्रश बनाने की सोची
कुछ प्रोटोटाइप बनाने के बाद वह बेहद शानदार टूथब्रश बनाने में सफल हो गए और उनका टूथब्रश इतना सुपर हिट हुआ कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम बॉलीवुड सितारे हैं उनके बांस के टूथब्रश इस्तेमाल करते हैं
आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 4 करोड़ तक पहुंच गया है जबकि उन्हें अपनी स्टार्टअप कंपनी को स्टार्ट किए हुए मात्र 2 साल ही हुए हैं उन्होंने अपनी इस कंपनी के द्वारा 300 लोगों को रोजगार दिया हुआ है उन्होंने अपने कंपनी के द्वारा 8 किसानों को बांबू की खेती के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का करार किया हुआ है और अब हालात ऐसे हो गए कि तमाम किसान उनके पास आकर कह रहे हैं कि आप हमारे साथ भी बांबू उगाने का कांटेक्ट करो
मित्रों यह जो दिल्ली में किसान आंदोलन चल रहा था, यह दरअसल सिर्फ एक हिंदू विरोधी और मोदी विरोधी साजिश थी, यदि किसानों को समस्या है तब कोई भी किसान अपनी समस्याओं पर बातें नहीं कर रहा बल्कि वह कभी खालिस्तान की बात करते हैं कभी मोदी के खिलाफ बात करते हैं तो कभी मजहबी नारे लगाते हैं।।
-ग्रीष्मा देसाइ की वाल से साभार






