लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया पर चल रहे एनकाउंटर और बुलडोज़र एक्शन के बाद अब योगी सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ भी बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा। सरकार की इस पहल को घुसपैठ पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा बड़ा कदम माना जा रहा है। आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने इस विशेष अभियान का पूरा ढांचा तैयार कर लिया है।
योगी सरकार क्यों कर रही है यह कार्रवाई?
राज्य सरकार के मुताबिक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति के तहत घुसपैठियों पर सख्त अभियान शुरू किया गया है। इससे प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से सही पात्र लोगों तक पहुँच सकेगा। सरकार का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे लोग कई योजनाओं का अनुचित लाभ ले रहे थे, जिसे अब रोका जाएगा।
अपराध और अवैध गतिविधियों पर रोक
सरकार के अनुसार घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। इन केंद्रों में तीन-स्तरीय सुरक्षा, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, फेस रिकग्निशन और थंब इम्प्रेशन जैसी उन्नत सुविधाएँ होंगी, जिससे सुरक्षा चूक असंभव होगी।
इस सख्ती से अपराधों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण आसान होगा और प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।
योजना कैसे लागू होगी?
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राज्य भर में घुसपैठियों की पहचान और वेरिफिकेशन के लिए व्यापक अभियान शुरू।
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संदिग्ध व्यक्तियों के आधार, वोटर आईडी सहित सभी पहचान दस्तावेजों की आधुनिक तकनीक से जांच।
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पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल और बायोमेट्रिक प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।
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17 शहरी निकायों को अवैध प्रवासियों की सूची तैयार कर अधिकारियों को सौंपने के निर्देश।
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हर जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर और प्रत्येक संभाग में 15,000 लोगों तक की क्षमता वाले स्थायी सेंटर बनाए जाएंगे।
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फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों पर विशेष कार्रवाई होगी।
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नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ाई जाएगी।
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नियम अनुसार घुसपैठियों को विदेशी अधिनियम 1946 के तहत भारत से निष्कासित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से भी अपील की है कि किसी को रोजगार देने से पहले उसकी पहचान अवश्य सत्यापित करें और घुसपैठ से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सतर्क रहें।






