30 साल से ओडिशा के राजेंद्र पात्रा भोर होने से पहले भवानिपटना की सड़कों को साफ़ करते रहे।
न किसी ने देखा, न तारीफ़ की—लेकिन उन्होंने कभी अपना काम नहीं छोड़ा।
राजेंद्र एक सफ़ाईकर्मी हैं, महीने की कमाई सिर्फ़ 9,000–10,000 रुपये।
इसी कमाई से वह अपने पाँच लोगों के परिवार का सहारा बने रहे और अपनी paralysis से पीड़ित पत्नी का इलाज भी करवाया।
वह रोज़ काम पर इसलिए जाते रहे क्योंकि एक दिन की छुट्टी का मतलब मज़दूरी कटना था क्योंकि उनके परिवार को उनकी ज़रूरत थी।
और क्योंकि उनके लिए काम करना ही आत्मसम्मान था। बीमारी हो, मुश्किल हालात हों या कोरोना का समय राजेंद्र ने कभी शहर को साफ़ रखना नहीं छोड़ा।
हर सुबह, बिना शोर, बिना शिकायत।
इस गणतंत्र दिवस 2026 पर वही ख़ामोश मेहनत राष्ट्रपति भवन तक पहुँची।
राजेंद्र पात्रा को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित ‘एट होम’ रिसेप्शन में आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।
यह सम्मान दुर्लभ है, लेकिन इससे भी दुर्लभ है वह हिम्मत, वह ईमानदारी और वह 30 साल की लगातार मेहनत, जो इसके पीछे छुपी है।






