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जब पहली माहवारी शर्म नहीं, सम्मान बन गई

ये हैं रेशमा सुरेश, केरल की रहने वाली एक युवा लड़की, जिसने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उसने अपनी पहली पीरियड्स आने पर घर वालों द्वारा किए गए जश्न को दिखाया, ऐसा जश्न मानो कोई रानी का राज अभिषेक हो रहा हो, और यह जश्न सिर्फ उसका नहीं, बल्कि पूरे परिवार की भावनाओं और सम्मान का प्रतीक बन गया था। 👑

सुबह-सुबह उसे दूध से स्नान कराया गया, जैसे किसी देवी को नहलाया जा रहा हो, और उस पल हर बूँद में केवल सफाई ही नहीं, बल्कि नई ज़िंदगी की शुरुआत की ऊर्जा झलक रही थी। 🥛✨

फिर मम्मी-पापा, दादा-नानी, सभी लोग आए, हाथों में फूलों की माला, आरती की थाली और चेहरे पर वह गर्व, जो शब्दों में नहीं, बल्कि आँखों में झलकता है—“हमारी बेटी अब बड़ी हो गई, अब उसकी अपनी पहचान है, उसकी अपनी शक्ति है।” 🌸
हल्दी का लेपन सिर्फ स्किन को ग्लो नहीं देता, बल्कि यह उस नई ज़िंदगी, नए अध्याय और महिला के रूप में उसके आत्मविश्वास का रंग भी बिखेरता है। 💛

और अंत में मिठाई ही मिठाई, क्योंकि यह पल केवल उसका नहीं, यह पूरे परिवार का, पूरे खानदान का उत्सव है, जहाँ हर मुस्कान, हर आशीर्वाद, हर नम आँखें इस नए सफर का सम्मान करती हैं। 🍬🍰

कुछ लोग पीरियड्स को शर्म की बात कह सकते हैं, लेकिन क्या शर्म? कहाँ है वह शर्म? 🤔

यहाँ तो गर्व की बारिश हो रही है, यहाँ तो शक्ति का जश्न हो रहा है, यहाँ तो एक लड़की अपनी महिला बनने की यात्रा का पहला कदम उठा रही है। 🌧️❤️

रेशमा ने दिखा दिया कि पीरियड्स कोई टैबू नहीं, यह पावर का पहला स्टेप है, अपनी पहचान, अपनी ताकत और अपने आत्मसम्मान को समझने का पहला पल है। 💪🔥

यह सिर्फ़ एक व्यक्तिगत कहानी नहीं, यह हर लड़की और हर परिवार के लिए संदेश है कि जीवन की हर शुरुआत को सम्मान और गर्व के साथ मनाना चाहिए।

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Author: sssrknews

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