संसद में आज राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने एलएसी पर चीनी टैंकों की मौजूदगी का जिक्र किया, जिसके बाद सदन में तीखी बहस शुरू हो गई। हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस पूरे मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की प्रतिक्रिया सामने आई है।
राहुल गांधी को बोलने देना चाहिए था: शशि थरूर
शशि थरूर ने कहा कि सरकार की ओर से जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी गई। उनके मुताबिक, राहुल गांधी जिस मुद्दे को उठाना चाह रहे थे, वह पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद है। थरूर ने बताया कि राहुल गांधी ने कारवां मैगजीन में प्रकाशित एक लेख का हवाला दिया था, जिसमें जनरल नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह कहने के बजाय कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, राहुल गांधी को अपनी बात रखने देनी चाहिए थी।
कोई भी वह लेख पढ़ सकता है
थरूर ने आगे कहा कि कारवां मैगजीन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और कोई भी वही लेख पढ़ सकता है, जिसका उल्लेख राहुल गांधी ने किया। उनके अनुसार, सरकार की जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया के कारण सदन की कार्यवाही बेवजह बाधित हुई। थरूर ने कहा कि संसद का मकसद ही चर्चा करना है और अगर किसी मुद्दे पर तथ्य गलत हैं, तो उन्हें तथ्यों के जरिए ही ठीक किया जाना चाहिए, न कि चर्चा को रोका जाना चाहिए।
सरकार को संयम बरतना चाहिए था
कांग्रेस सांसद ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी बात रखने का पूरा मौका ही नहीं मिला। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित लेख में सेना या सैनिकों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है, बल्कि सवाल केंद्र सरकार के कुछ फैसलों या फैसलों की कमी को लेकर हैं। थरूर के मुताबिक, राहुल गांधी भी यही मुद्दा उठाना चाहते थे और ऐसे में सरकार को ज्यादा संयम दिखाने की जरूरत थी।
पहले संसद में खुली बहस की परंपरा थी
शशि थरूर ने नेहरू काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में संसद में खुलकर बहस होती थी। उन्होंने याद दिलाया कि 1962 के चीन युद्ध के दौरान भी संसद में नियमित चर्चा होती रही और यहां तक कि सत्तापक्ष के सांसद भी सरकार की आलोचना कर सकते थे। इसी तरह 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भी संसदीय सत्र चले, संसद को जानकारी दी गई और देश को भरोसे में लिया गया।
चर्चा से डरने वाली सरकार क्यों?
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने सवाल किया कि देश में ऐसी सरकार क्यों है जो चर्चा से डरती है। उन्होंने इसे दुखद बताया और कहा कि सरकार को इस तरह की प्रतिक्रिया देने के बजाय संवाद को बढ़ावा देना चाहिए था। थरूर के अनुसार, चीन से जुड़ा मुद्दा पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं
शशि थरूर ने कहा कि विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री सहित सभी संबंधित नेताओं को संसद में बोलने का मौका मिलना चाहिए, ताकि देश को पता चल सके कि वास्तविक स्थिति क्या है। उन्होंने चेतावनी दी कि हर बात को छिपाना न तो लोकतंत्र के लिए अच्छा है और न ही संसद की कार्यवाही के लिए।






