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University of Delhi में कथित हमला: पत्रकार Ruchi Tiwari से मारपीट का आरोप, परिसर में तनाव

दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर में, जहाँ शिक्षा का मंदिर होना चाहिए था, वहाँ घृणा की आग भड़क उठी। यूजीसी के जाति-संबंधी नियमों के समर्थन में हजारों की भीड़ एकत्र हुई थी। बीच में खड़ी थीं रुचि तिवारी—एक यूट्यूबर एवं पत्रकार, जो मात्र सत्य को कैमरे में कैद करने आई थीं।

जब भीड़ को उनके पूर्ण नाम का पता चला—रुचि तिवारी—तब तालिबानी सोच वाले नीले कबूतर और नीली क़बूतरिया जाति का विष उगलने लगी। “यह ब्राह्मण है, इसे पकड़ो! मारो इसे यह ब्राह्मण है! “—ऐसे नारे गूँज उठे। सैकड़ों हाथ उन पर टूट पड़े। कुछ ने उनके बाल खींचे, कुछ ने गला घोंटने का प्रयास किया, कुछ ने वस्त्र फाड़ने की कोशिश की। आस-पास की दर्जनों नीली क़बूतरिया अकेली ब्राह्मण लड़की को घेरकर लिंच कर रही थी और कह रही थी —”आज….. तेरा परेड निकालेंगे!” सैकड़ो नीले कबूतर एक अकेली लड़की को घेरकर चिल्ला रहे थे—”इसे सबक सिखाओ!” भीड़ ने उन्हें घेर लिया और, बेहोश होने तक पीटा। यह मात्र हमला नहीं था—यह लिंच का उद्देश्य था, जाति के नाम पर हत्या का प्रयास था।

पर रुचि तिवारी झुकी नहीं। तालिबानी सोच वाली इस हिंसक नीले कबूतरों और कबूतरियो कि भीड़ के सामने वे डटी रहीं। डर से थर-थर काँपने के बजाय उन्होंने साहस से मुकाबला किया। उनकी आँखों में वही ज्वाला थी जो झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की आँखों में जलती थी—जब अंग्रेजों की सेना ने उन्हें घेरा था, तब भी वे नहीं डरी थीं। रुचि ने भी उसी प्रकार निर्भीक होकर कहा—”मैं पत्रकार हूँ, सत्य दिखाने आई हूँ।” और अंतिम सांस तक दिखाउंगी।

रुचि त्रिपाठी बेहोश हुईं, पर उनका मन नहीं टूटा। उन्होंने कहा—”यह हत्या का प्रयास था।

यह मात्र एक घटना नहीं—यह उस भारत की पुकार है जहाँ नारी को जाति के नाम पर नहीं, अपितु उसके साहस के लिए सम्मान मिले। वे झाँसी की रानी की उत्तराधिकारी हैं—जो अकेली होकर भी हजारो की भीड़ के सामने सरेंडर नही की बल्कि अंतिम समय तक दुश्मन से लोहा लेती हैं।
ऐसी ब्राह्मण बेटियाँ ब्राह्मण समाज की शक्ति हैं। ऐसी ब्राह्मण बेटियाँ डरती नहीं गीदड़ों की भीड़ से नही डरती।

रुचि तिवारी अकेली नही उसके साथ पूरा ब्राह्मण समाज है क्रिया की प्रतिक्रिया संभालना मुश्किल हो जाएगा तालिबानियों को।

विजय मिले या वीरगति, सब महादेव के नाम। ब्राह्मण की 1 लड़की भी हजारो गीदड़ों की भीड़ पर भारी है जिस दिन हमारे पुरुष निकल लिए फिर एक महीने के अंदर शांति स्थापित हो जाएगी।

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Author: sssrknews

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