नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च-स्तरीय बैठक करीब ढाई घंटे तक चली, जिसमें पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात और उनसे निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई यह दूसरी CCS बैठक है।
बैठक के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई, साथ ही आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई। ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रमुख मुद्दों पर मंथन
बैठक में कृषि, उर्वरक, शिपिंग, विमानन, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में उभरती चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए LPG और LNG के स्रोतों में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में संभावित राहत और बिजली क्षेत्र से जुड़े कदमों की समीक्षा की गई।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरी वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बढ़ाने हेतु कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।
उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन बनाए रखने और DAP/NPKS की सप्लाई के लिए अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं से तालमेल पर जोर दिया गया। साथ ही खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए विशेष रणनीति पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वैश्विक संकट के प्रभाव से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए लोगों तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है।
बैठक में शामिल प्रमुख नेता
इस बैठक में राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर, निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य शीर्ष अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
पहले भी हो चुकी है समीक्षा
इससे पहले 22 मार्च को भी पीएम मोदी ने इसी समूह के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया के हालात की समीक्षा की थी। उस दौरान खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई गई थी।
अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी पीएम मोदी ने इस संघर्ष को “गंभीर चुनौती” बताते हुए देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ऐसे समय में अफवाहों और राजनीतिकरण से बचना जरूरी है।
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आपसी समन्वय से काम करें, ताकि वैश्विक संकट का असर देश के नागरिकों पर न्यूनतम पड़े।






