दु:खद समाचार ????????
एक युग का अंत-
आपका जन्म जुलाई 1936 में पिता श्री रामप्रसाद गुप्त और माता श्रीमती रमापति देवी के घर , गोरखपुर में हुआ।
नामकरण: माता-पिता ने आपका नाम ‘परमेश्वर’ रखा।
शिक्षा: हाईस्कूल के बाद साहित्य में रुचि के कारण आपने ‘विशारद’ की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद आपने हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से ‘साहित्य रत्न’ की उपाधि भी प्राप्त की।
पारिवारिक व्यवसाय: आपके पिता का घड़ियों का प्रतिष्ठित व्यवसाय “राम प्रसाद आप्टिशियन” के नाम से रेती चौक पर स्थित है, जो पूर्वांचल में आज भी शीर्ष पर है।
वैवाहिक जीवन: आपका विवाह 1955 में श्रीमती गायत्री देवी जी के साथ हुआ। आपके एक पुत्र (श्री प्रदीप जी) और छह पुत्रियाँ हैं।
सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान
सरस्वती शिशु मंदिर: सन् 1952 में गोरखपुर के पक्कीबाग में देश के पहले ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की आधारशिला रखने वालों में श्री नानाजी देशमुख के साथ आपका नाम भी प्रमुख है।
संघ से जुड़ाव: आपका परिवार शुरू से ही ‘आर्यसमाज’ और ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ (RSS) के विचारों से प्रभावित रहा। आप नियमित रूप से संघ की शाखाओं में जाने लगे।
महत्वपूर्ण भूमि दान: आपने ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के छात्रावास हेतु लगभग 15 हजार वर्गफुट जमीन सहर्ष दान में दी।
इसी जमीन पर पिछले 40 वर्षों से ‘श्रीराम वनवासी छात्रावास’ चल रहा है, जहाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों के छात्र निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करते हैं।
संघ के प्रांतीय कार्यालय #माधवधाम की एक बड़ी भूमि भी आपके द्वारा ही दान की गई है।
व्यक्तित्व की विशेषताएँ
स्वभाव: आप बाल्यकाल से ही मेधावी और मृदुभाषी रहे हैं।
सेवा भाव: आप और आपके पुत्र प्रदीप जी दोनों ही अत्यंत मिलनसार, हँसमुख और दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
वर्तमान स्थिति: 90 वर्ष की आयु में होने के बाद भी आप सदैव प्रसन्नचित्त रहे।
आपका निधन हम गोरखपुर वासियों के लिये एक अपूर्णीये क्षति है।
परमात्मा आपकी आत्मा को चिर् शान्ति दे और अपने श्री चरणों में स्थान दे।
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शत शत नमन






