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Explainer: बांग्लादेश में जमात की करारी हार, तारिक रहमान की बड़ी जीत—भारत के लिए क्यों मायने रखती है ये राजनीतिक हलचल?

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: BNP की प्रचंड जीत, जमात की हार और भारत के लिए इसके मायने

बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। इस चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि Jamaat-e-Islami Bangladesh को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इस जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने BNP नेता Tarique Rahman को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बधाई दी और कहा कि बांग्लादेश की जनता उनके नेतृत्व में विश्वास बनाए रखेगी।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने चुनाव से पहले ही स्पष्ट किया था कि भारत स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनावों का समर्थन करता है तथा जनादेश का सम्मान करेगा।

बदलता राजनीतिक परिदृश्य

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच था। देश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व Muhammad Yunus कर रहे थे, ने पिछले वर्ष Sheikh Hasina की पार्टी अवामी लीग को भंग कर दिया था और उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था।

इस चुनाव की खास बात यह रही कि शेख हसीना देश से बाहर थीं और उनकी प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी Khaleda Zia का निधन हो चुका है। ऐसे में नेतृत्व की कमान उनके बेटे तारिक रहमान ने संभाली और पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

भारत की नजर क्यों टिकी है?

तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की नजर उनकी नीतियों और कूटनीतिक रुख पर रहेगी। हाल के वर्षों में बांग्लादेश में भारत-विरोधी नैरेटिव को हवा मिली और कई संवेदनशील घटनाओं ने चिंता बढ़ाई।

भारत के लिए राहत की बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी, जिसे भारत में अक्सर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) के प्रभाव से जोड़ा जाता है, इस चुनाव में सत्ता से दूर रही।

हालांकि ऐतिहासिक रूप से BNP और भारत के संबंध सहज नहीं रहे हैं, फिर भी मौजूदा हालात में भारत इसे एक लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहा है।

पाकिस्तान और चीन फैक्टर

शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। यदि जमात सत्ता में आती, तो इस नजदीकी के और गहराने की आशंका थी।

अब भारत यह देखेगा कि नई BNP सरकार पाकिस्तान और चीन के साथ अपने संबंधों को किस स्तर तक ले जाती है। सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन और आर्थिक साझेदारी आगे की दिशा तय करेंगे।

बीएनपी को पहले ही मिला था संकेत

भारत ने पहले ही BNP के प्रति सकारात्मक संकेत दिए थे। खालिदा जिया की बीमारी पर चिंता जताने से लेकर उनके निधन पर भारतीय विदेश मंत्री की बांग्लादेश यात्रा तक, कई कूटनीतिक इशारे दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समर्थन की पेशकश की थी, जिसका BNP ने सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया।

हिंदू समुदाय की उम्मीदें

हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंसा की घटनाओं ने विशेष रूप से हिंदू समुदाय को चिंता में डाला था। BNP ने इन घटनाओं की आलोचना की थी। ऐसे में इस जीत से अल्पसंख्यक समुदाय के बीच यह उम्मीद जगी है कि नई सरकार उनके अधिकारों और सुरक्षा को लेकर अधिक संवेदनशील रुख अपनाएगी।

आगे का रास्ता

BNP की जीत न तो भारत के लिए संकट है और न ही जश्न का अवसर। इसे एक ‘लिटमस टेस्ट’ की तरह देखा जा रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते इस बात पर निर्भर करेंगे कि नई सरकार संतुलित विदेश नीति अपनाती है या नहीं।

यदि तारिक रहमान की सरकार भरोसे और सहयोग का संदेश देती है, तो भारत व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ संबंधों को नया आयाम देने को तैयार रहेगा।

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Author: sssrknews

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