खामनेई भारत को क्या दे गया और हमने क्या किया ईरान और खामनेई के साथ :
अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा था :
भारत के बैंकों में हमारे ₹60,000 करोड़ पड़े हैं और यदि वे भारत के काम आ रहे हैं तो हमें खुशी है।
भारत हमारा करीबी मित्र है।
यह बात डॉ. Manmohan Singh की सरकार के कार्यकाल की है।
ईरान के भारत के पास “₹60,000 करोड़” — मामला क्या था? (पृष्ठभूमि)
भारत, Iran से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदता था।
भारत ने ईरान से तेल खरीदा, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों (US Sanctions) के कारण डॉलर में भुगतान करना संभव नहीं था।
फिर भुगतान कैसे हुआ?
एक विशेष व्यवस्था की गई — भुगतान भारतीय रुपये (₹) में किया जाने लगा।
ये रुपये भारतीय बैंकों में जमा किए जाते थे, जैसे:
• UCO Bank
• IDBI Bank
इन खातों में ईरान के हजारों करोड़ रुपये जमा हो गए थे।
₹60,000 करोड़ का मतलब क्या था?
ये पैसे भारत ने रोके नहीं थे, बल्कि ईरान के नाम पर भारतीय बैंकों में जमा थे।
उस समय ये दोनों बैंक आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में थे, और कहा जाता है कि ईरान के इन जमा रुपयों से उन्हें कुछ हद तक स्थिरता मिली।
अनुमानित राशि: लगभग ₹50,000 से ₹60,000 करोड़।
बाद में ईरान इन रुपयों का क्या करता था?
ईरान इन रुपयों का उपयोग भारत से वस्तुएँ खरीदने के लिए करता था, जैसे:
• दवाइयाँ
• चावल
• चाय
• खाद्यान्न
• औद्योगिक सामान
आज भी इस रकम का कुछ हिस्सा व्यापार के माध्यम से धीरे-धीरे उपयोग में लाया जा रहा है।
इस प्रकार, अयातुल्ला खामनेई का भारत के प्रति सकारात्मक रुख इसी आर्थिक सहयोग पर आधारित था, जिसकी पृष्ठभूमि में भारत-ईरान संबंध और ऐतिहासिक मैत्री (जिसकी जड़ें Jawaharlal Nehru के समय से मानी जाती हैं) शामिल रही है।
साभार — सचिन संघवी






