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Monsoon 2025: दिल्ली और अन्य राज्यों में कब पहुंचेगा मानसून? IMD ने जारी की संभावित तारीख 1/2

नई दिल्ली: दिल्ली सहित देश के कई हिस्से इस समय झुलसा देने वाली भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इस बीच मौसम विभाग ने मानसून को लेकर राहत भरी खबर दी है। ताजा अपडेट के अनुसार, इस सप्ताह से दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो रहा है और अपनी रफ्तार पकड़ रहा है। अनुमान है कि मानसून सामान्य समय से पहले ही 25 जून तक दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में पहुंच जाएगा।

एक बार फिर सक्रिय हुआ मानसून

मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि इस साल मानसून ने भारत में दस्तक 24 मई को केरल से दी थी। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून ने तेजी पकड़ी और 29 मई तक मुंबई समेत मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों और पूरे पूर्वोत्तर भारत में फैल गया। हालांकि, 28-29 मई से लेकर 10-11 जून तक इसकी गति थम गई थी। अब मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून 18 जून तक मध्य और पूर्वी भारत के शेष हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों को कवर कर लेगा। इसके बाद 19 जून से 25 जून के बीच यह उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में पहुंचने की संभावना है।

दिल्ली में तय समय से पहले पहुंचेगा मानसून

मौसम विभाग (IMD) के एक अधिकारी ने बताया है कि मानसून इस बार दिल्ली में अपनी सामान्य शुरुआत तिथि 27 जून से पहले ही 22-23 जून तक पहुंच सकता है। जून से सितंबर के बीच चलने वाले मानसून सीजन के दौरान पूरे भारत में औसतन 87 सेमी बारिश होती है। इस वर्ष इस औसत का करीब 106 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है, जो एक अच्छी खबर है।

इन राज्यों में होगी सामान्य से अधिक बारिश

आईएमडी के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में इस बार सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है। हालांकि, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों, पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य रह सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।

हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता मानसून का असर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि केरल या मुंबई में मानसून के जल्दी या देर से पहुंचने का यह मतलब नहीं होता कि देश के बाकी हिस्सों में भी यही पैटर्न रहेगा। मानसून की प्रगति पर वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय कारकों का प्रभाव होता है, जिससे इसमें समय-समय पर बदलाव आते रहते हैं।

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Author: sssrknews

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