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‘होर्मुज में केवल हमारे नाविक मारे गए’: 60 देशों की बैठक में भारत की सख्त चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं, जहां अमेरिका और इज़रायल मिलकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं। इसी बीच ब्रिटेन की पहल पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए 60 से अधिक देशों की एक अहम ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए। बैठक में उन्होंने कहा कि इस संकट में अब तक सिर्फ भारत के ही नागरिकों की जान गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज संकट में अब तक तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। ये सभी विदेशी जहाजों पर कार्यरत थे। भारत ने स्पष्ट किया कि इस संकट का समाधान केवल शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। सभी देशों से तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते आगे बढ़ने की अपील की गई।

विदेश सचिव ने यह भी बताया कि इस स्थिति का भारत पर सीधा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के दौरान भारत अपने नागरिकों को खो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी गतिरोध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

दरअसल, ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित इस अहम समुद्री मार्ग को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20% परिवहन होता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से पूरा होता है।

ब्रिटेन द्वारा आयोजित यह ‘होर्मुज समिट’ एक बहुपक्षीय पहल है, जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से सुचारु करना है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने इस बैठक के जरिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है। वहीं, ईरान की सेना आईआरजीसी द्वारा इस मार्ग को बंद किए जाने के बाद भारत, चीन, जापान, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे कई देशों की ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है।

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Author: sssrknews

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