नई दिल्ली: Narendra Modi बुधवार सुबह दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन से दो दिवसीय इज़रायल यात्रा पर रवाना हुए। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे उनका विमान उड़ान भरा। उनके आगमन से पहले इज़रायल की संसद Knesset तिरंगे की रोशनी से जगमगा उठी। नेसेट के स्पीकर ने इस विशेष क्षण की तस्वीर साझा कर उनका स्वागत किया।
इज़रायल भारत का अहम रणनीतिक साझेदार
रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत और इज़रायल के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात इज़रायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और राष्ट्रपति Isaac Herzog से होगी।
वार्ता के प्रमुख मुद्दों में रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार, कृषि, जल प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे नेसेट को संबोधित करेंगे—जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला संबोधन होगा।
उन्होंने इज़रायल में बसे भारतीय समुदाय से भी मिलने की बात कही और 2017 की अपनी पहली इज़रायल यात्रा को याद किया।
क्या है कार्यक्रम
इज़रायल के स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:45 बजे प्रधानमंत्री मोदी तेल अवीव के Ben Gurion Airport पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नेतन्याहू स्वयं उनका स्वागत करेंगे।
शाम को वे येरुशलम में नेसेट में औपचारिक स्वागत समारोह में शामिल होंगे और संसद को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे टेक्नोलॉजी और एआई पर केंद्रित एक इनोवेशन कार्यक्रम में भाग लेंगे तथा रात में आधिकारिक रात्रिभोज में शामिल होंगे।
दूसरे दिन वे होलोकॉस्ट स्मारक Yad Vashem जाएंगे। इसके बाद दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। संयुक्त बयान जारी होने के बाद प्रधानमंत्री भारत के लिए रवाना हो जाएंगे।
‘हेक्सागॉन’ गठबंधन पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले नेतन्याहू ने भारत को एक प्रस्तावित “हेक्सागॉन” गठबंधन में शामिल करने की घोषणा की। उन्होंने इसे उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का एक व्यापक ढांचा बताया।
इस प्रस्तावित संरचना में भारत और इज़रायल के अलावा कुछ अरब, अफ्रीकी और भूमध्यसागरीय देशों (जैसे ग्रीस और साइप्रस) की भागीदारी की बात कही गई है। इसे भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) जैसी कनेक्टिविटी पहलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
नेतन्याहू ने भारत को “वैश्विक शक्ति” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं और साझा हितों के आधार पर सहयोग को नई दिशा दी जाएगी।






