आज से फिर 20 साल पीछे चलते हैं 2005, और आज बात योगी आदित्यनाथ और मुख्तार की नही होगी ,,आज बात होगी , पूर्वांचल के एक कद्दावर नेता स्वर्गीय श्री कृष्णानंद राय की और गोरखनाथ के उस महंत की जिसे आज कल लोग अजय सिंह विष्ट साबित करने पर तुले हुए हैं 👇
अब भले ही समूचे यूपी में कानून का बोलबाला है, लेकिन एक वक्त था, जब केवल माफियाओं की तूती बोलती थी. आलम यह था कि कोई भी पुलिस अधिकारी किसी भी जगह पर लंबे समय तक टिक नहीं पाता था और जब बात पूर्वांचल की हो तो माफियाओं की फेहरिस्त लंबी है, जिसमें सबसे अधिक चर्चा रही मुख्तार अंसारी की, जो अब इस दुनिया में नहीं है. पूर्वांचल में अगर सबसे अधिक गैंगवार हुई तो वो केवल वर्चस्व के लिए. ऐसी ही एक वर्चस्व की लड़ाई यूपी के गाजीपुर जिले में हुई थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय की हत्या हो गई थी. कृष्णानंद राय की हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था. क्योंकि इस हत्याकांड में 100-200 नहीं बल्कि 500 राउंड से अधिक फायरिंग हुई थी. इस हत्याकांड को चोटी कांड भी कहा जाता है.
मुख्तार अंसारी के घर को फाटक बोलते हैं. फाटक में ये सब मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान, जीवा, मुन्ना बजरंगी, गोरा राय, अंगद राय और हनुमान पांडे, जितना गैंग था, सब इकट्ठा हो गया था. ये सब मुख्तार के यहां हथियार लेकर पहुंच गए.
मुख्तार तो बैठा था जेल में और ये हुआ कि भाई कैसे मारा जाए कृष्णानंद राय को, तो डीआईजी साहब को बताया गया. डीआईजी साहब भी हाथ खड़ा कर दिए. फिर डीजी साहब को बताया गया. एक आईजी रैंक का अफसर को कहा गया कि जा कर के ऊपर बता दीजिए. उन्होंने उन्हीं के परिवार के बड़े नेता, उनको बता दिया. वो अफसर कहता है कि उन्होंने एक कान से सुना और दूसरे कान से निकाल दिया. दिन था 28 नवंबर का साल 2005, कृष्णानंद राय जाते हैं, क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने. आते हैं तो रास्ते में 500 गोलियां चलती हैं, एके-47 और अन्य बंदूकों से.’
कृष्णानंद राय को 67 गोली लगी,. 6-7 लोग मारे गए और साहब वो घटना होती है. मुख्तार अंसारी इतना खुश हुआ. उसने फैजाबाद जेल में बंद अपने जो भी विधायक रहा है, उसको फोन करता है, वो सर्विलांस पर था. भोजपुरी में मुख्तार बोलता है कि अरे मुन्नवा ने मार दिया. ओकर चोटईया काट लिया. वो चुटिया रखते थे. तब मुन्ना बजरंगी ने उनकी चोटी काट ली और वो चीज एसटीएफ के उसमें रिकॉर्ड हो गया और वही एक चीज थी, जिसमें मुख्तार अंसारी को कभी जमानत नहीं मिली. और दुखद ये रहा कि दिनदहाड़े गोली चलती है, उसमें कई गवाह सड़क पर मरा मिला. कोई सांसद प्रतिनिधियों के घर में मरे मिले और ये हाल रहा कि कृष्णानंद राय तक के भतीजों ने गवाही नहीं दी.’
और इस कांड में शामिल सभी मुख्तार अंसारी के शूटर जीवा जिसे लखनऊ में पेशी के दौरान ऊपर भेज दिया गया, राकेश पाण्डेय उर्फ हनुमान पाण्डेय जिसका इनकाउंटर हो गया, रहमान जिसे 72 हूरों के पास पंहुचा दिया गया,मुन्ना बजरंगी जिसे जेल में ही टपका दिया गया और मुख्तार जिसे वहां भेजा गया जहां से कोई वापस नही आता,,
एक बात और उस समय पूर्वांचल में बहुत बड़े बड़े ब्राह्मण , ठाकुर और अन्य जातियों के बाहुबली थे लेकिन कोई नही आया,, 👇
उस समय सिर्फ योगी आदित्यनाथ, उर्फ गोरखनाथ के महंत उर्फ आप के द्वारा घोषित किए गए जातिवादी अजय सिंह विष्ट ही आए थे….






