सोमनाथ मंदिर का रहस्य: 800 साल बाद खुला तहखाना
भूमिका
गुजरात के पश्चिमी तट पर, अरब सागर की लहरों के बीच खड़ा सोमनाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रमाण भी है। यह मंदिर हजारों वर्षों से भारत के इतिहास की अनेक घटनाओं का साक्षी रहा है। लेकिन इसके गर्भ में एक ऐसा रहस्य छिपा था, जिसके बारे में केवल किंवदंतियाँ ही सुनाई देती थीं। 800 साल तक बंद रहे तहखाने के दरवाजे के पीछे क्या छुपा था, यह जानने की उत्सुकता हर किसी के मन में थी। जब अंततः वह दरवाजा खुला, तो जो दृश्य सामने आया, उसने सबको स्तब्ध कर दिया।
अध्याय 1: इतिहास के गर्भ में दबा मंदिर
सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी है। लगभग 1000 साल पहले, इस मंदिर को कई बार विदेशी आक्रमणकारियों ने तोड़ा। सबसे पहले, अफगानिस्तान से आए मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। उसने मंदिर को लूटा, शिवलिंग को खंडित किया और मंदिर की संपत्ति को अपने देश ले गया। लेकिन हर बार जब मंदिर टूटा, हिंदू राजाओं ने उसे फिर से बनाया। चार-पांच बार यह मंदिर बड़े स्तर पर टूटा और हर बार उसकी भव्यता को बचाने के लिए पुजारियों और भक्तों ने अपनी जान जोखिम में डाली।
मंदिर के पुजारियों ने इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए एक गुप्त तहखाना बनाया, जिसमें मंदिर के प्राचीन अवशेष, पूजा के चिन्ह और स्थापत्य शैली के प्रमाण रखे गए। यह तहखाना सदियों तक बंद रहा, और उसके बारे में केवल whispers ही सुनाई देती थी। कहा जाता था कि तहखाने में छुपे रहस्य को देखने की हिम्मत किसी में नहीं थी, क्योंकि वहां जाने वालों पर श्राप लग सकता था।
अध्याय 2: अमेरिका से लौटे वैज्ञानिक सोमेश अग्रवाल
सोमेश अग्रवाल, एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक, जो नासा में कार्यरत थे, विज्ञान को ही अपना धर्म मानते थे। उन्होंने बचपन भारत में बिताया, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। भारत की संस्कृति, पूजा-पद्धति, और मंदिरों को वह अंधविश्वास मानते थे। उनके माता-पिता कई बार उन्हें भारत लौटने के लिए कहते, लेकिन सोमेश का कहना था कि भारत में अंधविश्वास फैला हुआ है।
एक दिन, उन्हें अमेरिका में अपने पिता के देहांत की सूचना मिली। मजबूरी में सोमेश भारत लौटे, अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उनकी मां ने उनसे आग्रह किया कि अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करें—उनकी अस्थियों को सोमनाथ मंदिर के समुद्र में विसर्जित करें। सोमेश ने मां के आंसुओं के आगे झुककर यह जिम्मेदारी उठाई, लेकिन उनके मन में अब भी श्रद्धा नहीं थी।
अध्याय 3: मंदिर में पहली बार दर्शन
सोमनाथ मंदिर में सोमेश अपने रिश्तेदारों के साथ पहुंचे। मां ने उन्हें मंदिर के इतिहास के बारे में बताया—कैसे बार-बार मंदिर टूटा, कैसे पुजारियों ने तहखाने में ऐतिहासिक सबूत छुपाए। मां की बातें सुनकर सोमेश को लगा कि यह सब केवल अंधविश्वास है। उन्होंने ठान लिया कि तहखाना खोलकर सच दुनिया के सामने लाएंगे।
सोमेश ने मंदिर के मुख्य पुजारियों से तहखाना खोलने की अनुमति मांगी। शुरुआत में पुजारी हिचकिचाए, लेकिन सोमेश के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध की बात सुनकर उन्होंने इजाजत दे दी। तहखाने का दरवाजा एक विशाल पत्थर से बंद था, जिसे हटाने में काफी मेहनत लगी। दरवाजा सदियों से बंद था, खोलना आसान नहीं था। आखिरकार, वैदिक मंत्रों के जाप के बाद दरवाजा खुल गया।






