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अरविंद श्रीनिवास: Google को चुनौती देने वाला भारतीय युवा जिसने $18 बिलियन की Perplexity AI खड़ी की

अरविंद श्रीनिवास

भारतीय मूल के अरविंद श्रीनिवास ने मात्र दो वर्षों में अपनी कंपनी Perplexity AI को $18 बिलियन (लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये) की कंपनी बनाकर सर्च इंजन की दुनिया में Google के दशकों पुराने एकाधिकार को हिला दिया है। चेन्नई के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर सिलिकॉन वैली तक का उनका सफर दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और नवाचार की एक प्रेरणादायक कहानी है।

कौन हैं अरविंद श्रीनिवास?

अरविंद श्रीनिवास Perplexity AI के संस्थापक और सीईओ हैं, जो एक अत्याधुनिक AI-संचालित सर्च इंजन है। यह पारंपरिक लिंक-आधारित सर्च के बजाय सीधे और सटीक जवाब देता है, साथ ही उन जवाबों के विश्वसनीय स्रोत भी बताता है। Google के प्रभुत्व वाले सर्च इंजन बाजार में, Perplexity AI एक गेम-चेंजर के रूप में उभरा है, जिसने मात्र 30 साल की उम्र में अरविंद को एक वैश्विक तकनीकी लीडर बना दिया है।

चेन्नई से सिलिकॉन वैली तक का सफर: चुनौतियों भरा मार्ग

अरविंद का शुरुआती जीवन चुनौतियों से भरा था। 7 जून 1994 को चेन्नई में जन्मे अरविंद के घर में कंप्यूटर नहीं था। उन्होंने बचपन में पुरानी पत्रिकाओं और कबाड़ से छोटे मॉडल बनाकर अपनी तकनीकी जिज्ञासा को शांत किया।

IIT मद्रास: संघर्ष और शिक्षा

2011 में IIT मद्रास में दाखिला लेना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन आर्थिक चुनौतियाँ भी थीं। परिवार फीस का खर्च नहीं उठा सकता था, इसलिए अरविंद दिन में पढ़ाई करते और रात में लैब में काम करने के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन देकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकालते थे। उन्हें अपने अकादमिक सफर में कई झटके लगे, जैसे कैलकुलस में फेल होना और उनके रिसर्च आइडिया को प्रोफेसर द्वारा यह कहकर खारिज कर देना कि “डेटा के बिना आइडिया बेमतलब है।” इन्हीं अनुभवों ने उन्हें Kaggle से ओपन डेटासेट डाउनलोड करने और Amazon EC2 पर अपने पहले AI मॉडल को आधी रात में चादर के नीचे चलाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने सीखा कि “जैसे मशीन बिना रन किए नहीं चलती, वैसे ही जिंदगी भी बिना पसीना बहाए आगे नहीं बढ़ती।”

UC Berkeley: अमेरिका में अनुकूलन और पहचान

2016 में, अरविंद पूरी स्कॉलरशिप के साथ UC Berkeley पहुंचे। भारत की मितव्ययी आदतें यहां भी बनी रहीं, जहां डॉलर की उच्च लागत के कारण उन्हें धनिया खरीदने के लिए भी सोचना पड़ता था। F1 वीज़ा के प्रतिबंधों के कारण वे पार्ट-टाइम जॉब नहीं कर सकते थे, इसलिए TA (टीचिंग असिस्टेंट) के तौर पर काम करके खर्च चलाते थे। अमेरिकी क्लासरूम में “मैं असहमत हूं” कहकर प्रोफेसरों को टोकना उनके लिए एक सांस्कृतिक झटका था। उनके पहले दो रिसर्च पेपर रिजेक्ट हुए, लेकिन तीसरे पेपर के लिए उन्होंने 12 घंटे तक कोड पर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप ICLR में उन्हें “स्पॉटलाइट” मिला। यह उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान की शुरुआत थी।

DeepMind: चूहों से भरी रातों से पहचान तक

2019 में DeepMind में इंटर्नशिप के दौरान, उन्हें लंदन में एक सस्ती, चूहों से भरी बेसमेंट रूम में रहना पड़ा, जहां नींद नहीं आती थी। इसलिए वे अक्सर लाइब्रेरी के सोफे पर रात बिताते थे। शाम 6 बजे के बाद, जब ऑफिस खाली हो जाता था, तो वे व्हाइटबोर्ड पर Transformer पेपर को समझते और Google की किताब “In the Plex” पढ़ते थे। एक दिन उनके कोड ने टीम की लेटेंसी को 20 मिलीसेकंड कम कर दिया, जिसने टीम लीड का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें सराहना मिली। इस अनुभव ने उन्हें सिखाया: “संघर्ष अस्थायी है, प्रभाव स्थायी है।”

Perplexity की शुरुआत: गैराज से वैश्विक मंच तक

2022 की गर्मियों में, अरविंद ने तीन दोस्तों के साथ Zoom कॉल पर SQL जनरेशन से लेकर सर्च के एक नए तरीके पर चर्चा की। इसी दौरान Perplexity AI का विचार आया। “Perplexity” शब्द एक भाषा मॉडल के ‘कन्फ्यूजन’ को मापता है। उनका लक्ष्य था कि उपयोगकर्ताओं को 10 लिंक के बजाय सीधा जवाब मिले, साथ ही उसके विश्वसनीय स्रोत भी।कंपनी एक गैराज में शुरू हुई, जहां टीम खुद GPU को मॉनिटर करती थी और अरविंद ने मॉडल टेस्टिंग के लिए अपनी क्रेडिट कार्ड लिमिट भी बढ़ाई।

Google की पहली घबराहट: एक नए युग का सूत्रपात

2024 के अंत तक, Perplexity के सर्वर पर सर्च ट्रैफिक में 10 गुना वृद्धि हुई। Google के एक वरिष्ठ प्रोडक्ट मैनेजर ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मुझे इनका UI पसंद नहीं, लेकिन इनके सर्च रिज़ल्ट तेज और बेहतर हैं।” इस टिप्पणी ने Google के माउंटेन व्यू कार्यालय में चिंता पैदा की और उन्हें मीटिंग बुलानी पड़ी। यह पहला मौका था जब दुनिया ने महसूस किया कि Google को भी प्रतिस्पर्द्धा से डर लगता है।

अरबों की कंपनी, संघर्षों की यादें

केवल एक साल में SoftBank, Nvidia, और Jeff Bezos जैसे प्रमुख निवेशकों ने Perplexity AI में निवेश किया, जिससे कंपनी का मूल्यांकन $18 बिलियन (लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये) हो गया। अरविंद की व्यक्तिगत संपत्ति भी 50,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई, लेकिन वह आज भी उन चूहों से भरी रातों को नहीं भूले हैं।

अंत नहीं, एक नई शुरुआत

अरविंद श्रीनिवास ने यह साबित किया है कि:

  • मध्यमवर्गीय सीमाएं सपनों को रोक नहीं सकतीं।
  • वीज़ा की शर्तें सपनों से बड़ी नहीं होतीं।
  • सफलता चूहों से भरी बेसमेंट से भी शुरू हो सकती है।

आज Perplexity Google के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। अरविंद भारत के उस युवा सपने का प्रतीक हैं जो कभी हार नहीं मानता। इतिहास वही लिखते हैं जो मुश्किलों का सामना करते हैं, उनसे डरते नहीं। अरविंद ने यह कर दिखाया, और इसलिए वह अब सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक मिसाल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है।

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Author: sssrknews

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