त्रिक भाव क्या होता है जन्मकुण्डली में आओ जानें
वैदिक ज्योतिष में हर कुंण्डली में 12 भाव होते हैं, जिनमें 6वां, 8वां और 12वां भाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं इन्हें त्रिक भाव या दुष्ट भाव कहा जाता है.
माना जाता है कि ये भाव जीवन में संघर्ष, बाधाएं, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक उतार-चढ़ाव से जुड़े होते हैं इन तीनों भावों को कई बार ‘कुण्डली का छिद्र’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये व्यक्ति के जीवन में छुपी हुई समस्याओं और अचानक आने वाली चुनौतियों का संकेत देते हैं।
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जब इन भावों का प्रभाव कमजोर या अशुभ होता है, तो जातक को मानसिक तनाव, धन संबंधी परेशानियां और स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ सकता है इसी वजह से त्रिक भावों का अध्ययन ज्योतिष में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ये जीवन के कठिन पहलुओं और उनके संभावित समाधान को समझने में मदद करते हैं।
कुण्डली का छठा भाव क्या कहता है
संघर्ष, रोग और शत्रु पक्ष (छठा भाव)
कुण्डली का छठा भाव रोग, शत्रु, कर्ज, कानूनी विवाद और कार्यस्थल के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है जब यह भाव कमजोर या पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है यह भाव व्यक्ति की संघर्ष क्षमता और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की ताकत को भी दर्शाता है।
आठवां भाव कुण्डली का सबसे गूढ़ और रहस्यमयी
रहस्य, संकट और परिवर्तन (आठवां भाव)
आठवां भाव कुंण्डली का सबसे गूढ़ और रहस्यमयी भाव माना जाता है यह अचानक होने वाले परिवर्तन, दुर्घटनाओं, मानसिक दबाव और जीवन में गहरे उतार-चढ़ाव का संकेत देता है इस भाव के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में अप्रत्याशित घटनाएं घट सकती हैं, जो उसे भावनात्मक और मानसिक रूप से प्रभावित करती हैं साथ ही यह भाव गुप्त ज्ञान और आध्यात्मिक विषयों से भी जुड़ा होता है।
कुण्डली का बारहवां भाव
व्यय, हानि और अलगाव (बारहवां भाव)
बारहवां भाव खर्च, हानि, अस्पताल व्यय, जेल, नींद की समस्या और अपनों से दूरी का संकेत देता है इस भाव के कारण व्यक्ति के धन का व्यय बढ़ सकता है और जीवन में एकाकीपन की स्थिति बन सकती है हालांकि यह भाव विदेश यात्रा, मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है, जो व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है।
त्रिक भाव का वास्तविक महत्व
ज्योतिष के अनुसार त्रिक भाव केवल नकारात्मक नहीं होते यदि इन भावों के स्वामी ग्रह अनुकूल स्थिति में हों तो यह ‘विपरीत राजयोग’ बना सकते हैं यह योग व्यक्ति को संघर्ष के बाद बड़ी सफलता, सम्मान और आर्थिक उन्नति दिला सकता है सही दृष्टिकोण और उपायों के साथ ये भाव जीवन में परिवर्तन और प्रगति का मार्ग भी खोलते हैं।
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किसी को भूत-प्रेत या तांत्रिक आदि का भय हो तो
यदि किसी ने कुछ कर दिया हो तो उससे बचने हेतु सरल उपाय
1️⃣ शनिवार को काले धतूरे की जड़ बाह में बांध देने से प्रेत बाधा शांत हो जाएगी l
2️⃣ लहसुन और हींग पानी में घोलकर उसका रस बनाकर, जिस समय प्रेत बाधा हो, उस समय उसके नाक में नस्य दे दो और आंख में अंजन दे दो l प्रेत बाधा तुरंत शांत हो जाएगी l
3️⃣ शिव गीता का पाठ करें और सामने जल भर कर रखें तथा उसमें थोड़ा सा गंगाजल डाल दे। फिर 108 बार मंत्र जपे ” टं, टं, टं…”
फिर वह जल घर में और अपने ऊपर भी छाँट दो, सारा तांत्रिक प्रयोग मिट जायेगा l
4️⃣ नारायण कवच का पाठ करें सामने जल भरकर रखें l उस जल में थोड़ा गंगाजल डाल दें l पाठ करने के बाद उस जल में फूंक मारकर जिसको भी पीड़ा हो उसे पिला दें और उस पर थोड़ा छाँट दें l रोज ऐसा करें l
5️⃣ 4 बार गायत्री मंत्र बोलकर जो सूर्य भगवान को जल देता है उस पर मैली विद्या असर नहीं कर सकते l
6️⃣ गिलोय की 108 समिधा ले लें । और 1 कटोरी में गाय का घी ले लें । दोनों तरफ से समिधा का छोर घी में डुबो कर, महामृत्युंजय मंत्र की 108 आहूति डालें। और संकल्प करें कि “किसी ने कुछ किया है तो उसका उसी पर वापस जाये।…..” हरि ॐ ॐ ॐ…….
7️⃣ गणेश जी की पूजा में जो दुर्वा काम में लाते हैं वो गणपति जी का सुमिरन करते हुए पीड़ित व्यक्ति के तकिया के नीचे रख दे। और प्रार्थना करें कि यह जल्दी ठीक हो जाए l सुबह लेकर पानी में बहा दे। तीन दिन तक ऐसा करे।
छ: दिन और ऐसा करे लेकिन अब पानी में ना बहाये, रात को रखा सुबह इकट्ठा करते गये। 7वें दिन कोयला जलाकर उस पर टुकड़ा टुकड़ा करके वो दुर्वा जला दें। फिर उसे भी नदी में प्रवाहित करें। संकल्प करे कि जिसने किया उसका उसी पर गया l
घर की शोभा बढ़ाने के लिए
१. किसी का बुरा न माने , किसी का बुरा ना सोचे..तो घर स्वर्ग हो जायेगा
२ .आव नही, आदर नही, नही नयनन मे नेह
तुलसी वा घर ना जायियो चाहे कंचन बरसे गेह
आप के घर मे कोई आये तो उस को आदर दीजिये आप के घर की शोभा बढेगी..
३. “हे प्रभु आनंद दाता” ये प्रार्थना रोज घर मे सब मिलकर गाओ तो घर स्वर्ग हो जाये..
कंठस्थ करो….घर के झगडे दूर होंगे…।
अपाचन हो तो
अपाचन बढ़ा तो अजवाईन, सोठ और काली मिर्च का मिश्रण करके वो पाउडर एक चुटकी ले तो पाचन ठीक होगा…सुबह ले ले और २/३ घंटे बाद भोजन करे…
सुख-शांति व धन वृद्धि हेतु
सफेद पलाश के एक या अधिक पुष्पों को किसी शुभ मुहूर्त में लाकर तिजोरी में सुरक्षित रखने से उस घर में सुख-शांति रहती है, धन-आगमन में बहुत वृद्धि होती है





