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AI के खिलाफ क्यों खड़ी हुईं सोना महापात्रा? जानिए वजह

AI का बायकाट क्यों किया सोना महापात्रा ने?
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प्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा ने एक उडिया भजन गाने के प्रस्ताव को केवल इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि इसका संगीत किसी पारंपरिक बैंड या मानव संगीतकार द्वारा नहीं, बल्कि एक AI-जनित (Artificial Intelligence) सिंथेटिक बैंड द्वारा तैयार किया गया था। उन्होंने अपने एक लेख ‘Where does the human artiste go when AI takes the stage?’ में स्पष्ट किया कि यह जानकारी उन्हें शुरुआत में नहीं दी गई थी।

सोना के अनुसार, AI द्वारा गढ़े गए काल्पनिक बैंड और पात्रों के लिए गाना एक ऐसा निर्णय था जो कलाकार की प्रामाणिकता और रचनात्मकता के सिद्धांतों के खिलाफ जाता है। अपने लेख में सोना ने AI के उपयोग और इसके नैतिक पक्ष पर गहराई से विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तकनीक के खिलाफ नहीं हैं और उन्होंने स्वयं भी अपने वीडियो ‘घणे बदरा’ में AI का सीमित उपयोग किया है। लेकिन उन्होंने मानव-संचालित तकनीक और कॉर्पोरेट-निर्मित AI बैंड्स के बीच एक स्पष्ट अंतर रेखा खींची।

सोना का मानना है कि मानव कलाकार जब तकनीक का सहारा लेता है, तो वह अपने काम को बेहतर बनाने के लिए ऐसा करता है; जबकि AI से तैयार किए गए कृत्रिम बैंड्स असली कलाकारों की जगह लेने के उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक मानव कलाकार अपनी आवाज़ और विश्वसनीयता देकर किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा क्यों बने, जो अंततः उसी के अस्तित्व और रोजगार को अदृश्य करने का खतरा पैदा करता है?

सोना महापात्रा के इस कड़े रुख और लेख में उठाए गए प्रश्नों ने संगीत उद्योग में AI ट्रेनिंग डेटा के कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा और कलाकारों के मुआवजे जैसे गंभीर मुद्दों को बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर बिना सहमति के कलाकारों की कृतियों से सीखकर गाने तैयार करने वाला AI मशीन-स्तरीय उत्पादन तो कर सकता है, लेकिन मानव भावनाओं और सांस्कृतिक जुड़ाव की बराबरी नहीं कर सकता।

भविष्य के संकेतः

यह घटना मनोरंजन उद्योग और जनरेटिव एआई (Generative AI) के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत देती है:

– कलाकार अब केवल AI का उपयोग करने के बजाय यह तय करने लगे हैं कि नैतिक सीमाएं कहाँ खत्म होती हैं। भविष्य में “मानव-निर्मित कला” बनाम “AI-निर्मित सामग्री” के बीच स्पष्ट विभाजन देखने को मिलेगा।
– जनरेटिव संगीत प्रणालियों को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा और कॉपीराइट कानूनों पर सख्त नियम बनेंगे। कलाकारों की आवाज़ और शैलियों के अनधिकृत उपयोग पर कानूनी बहस तेज होगी।
-व्यावसायिक स्तर पर एआई भले ही तेज़ी से और सस्ता संगीत तैयार कर ले, लेकिन प्रामाणिक मानव भावना (Emotional Authenticity), विश्वसनीयता और सांस्कृतिक जड़ों का मूल्य और बढ़ जाएगा।

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Author: sssrknews

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