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‘हथियारी नक्सल से ज्यादा खतरनाक दिमागी नक्सल’, लाल किले से PM मोदी ने क्यों कही ये बात?

स्वतंत्रता दिवस 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना 21वीं सदी के भारत के लिए बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने नक्सलवाद को लाखों युवाओं के भविष्य और देश के परिवारों के सपनों को बर्बाद करने वाला बताया।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि करीब चार दशकों तक नक्सलवाद ने भारत के बड़े हिस्से और आबादी के एक हिस्से को प्रभावित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद ने बंदूक के दम पर शासन करने की कोशिश की और संविधान की अवहेलना की।

उन्होंने कहा, “आज हथियारों वाले नक्सल से बड़ी चुनौती दिमागी नक्सली ज्यादा खतरनाक हैं, इससे देश को बचाना होगा।”

नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प पूरा करने का दावा

पीएम मोदी ने कहा कि आम नागरिकों की रक्षा करते हुए देश के 3,500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण देश के कई हिस्सों में हिंसा और खून-खराबे का दौर रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उनके मुताबिक, अब नक्सली और माओवादी हिंसा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सरकार इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

जहां कभी गोलियां गूंजती थीं, वहां लहरा रहा तिरंगा

पीएम मोदी ने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियों की आवाज सुनाई देती थी और जहां हिंसा का माहौल था, आज उन्हीं क्षेत्रों में विकास और विश्वास का माहौल बन रहा है।

उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में अब तिरंगा शान से लहरा रहा है और ये क्षेत्र नक्सलवाद मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

स्थिर सरकार और लोकतंत्र को बताया भारत की ताकत

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत की राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के पास स्थिर राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्याय व्यवस्था और मार्गदर्शन देने वाला संविधान है।

प्रधानमंत्री ने हाल में हुए व्यापार समझौतों को भी भारत के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने देश के MSMEs से इस अवसर का लाभ उठाने और इसे गंवाने से बचने की अपील की।

‘दिमागी नक्सल’ पर PM मोदी का संदेश क्या है?

अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि नक्सलवाद केवल हथियारों और हिंसा तक सीमित चुनौती नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसी विचारधारा और सोच भी चुनौती है जो देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ माहौल तैयार करती है।

इसलिए प्रधानमंत्री ने हथियारबंद नक्सलवाद के साथ-साथ ऐसी विचारधारा से भी देश को बचाने की बात कही।

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