पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात में क्या रहा खास
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि पीएम मोदी और शी जिनपिंग, दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नज़रिए से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन ‘आपसी’ बातों का पालन करना चाहिए, जिसमें आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित सर्वोपरि होना चाहिए।
सात साल बाद भारत आए जिनपिंग
बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। गलवान झड़प के बाद शी का यह भारत का पहला दौरा है। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद, आज शाम वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। 15 जून 2020 को हुई गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ गया था, लेकिन व्यापार जारी रहा। 2020-21 में चीन से भारत का आयात लगभग 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया। इसका मतलब है कि गलवान झड़प के बाद से चीन से आयात दोगुना हो गया है।
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