नई दिल्ली: UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की। अपने वीडियो में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि उन्हें खड़े होकर UPI पर लगाए जा रहे शुल्क के फैसले को वापस लेना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस फैसले के जरिए आम भारतीयों पर टैक्स का बोझ डाला जा रहा है और अमेरिका को बड़ी रकम दी जा रही है। हालांकि, सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR नियम
दरअसल, NPCI के नए फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क आम ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
वहीं, Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजेक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 तक के P2M लेनदेन भी इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। सरकार के मुताबिक, ₹2,000 से कम के लेनदेन P2M ट्रांजेक्शन की मात्रा का 95 प्रतिशत से अधिक हैं।
कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।
राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण
अपने वीडियो में राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब इंदिरा गांधी से पूछा गया था कि वह लेफ्ट या राइट में से किस दिशा में जाना चाहती हैं, तो उनका जवाब था कि वह न लेफ्ट की ओर हैं और न राइट की ओर, बल्कि सीधे खड़ी रहती हैं।
राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका रुख अलग है और उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का फैसला किया है।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी से UPI पर प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग दोहराई।
सरकार ने UPI शुल्क को टैक्स मानने से किया इनकार
सरकार के मुताबिक, MDR को UPI उपयोगकर्ताओं पर लगाया जाने वाला टैक्स नहीं माना जाना चाहिए। यह शुल्क भुगतान प्रक्रिया में शामिल बैंकों, ऐप प्रदाताओं और अन्य भागीदारों के बीच वितरित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और ग्राहक सेवाओं को मजबूत करना है।
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही, सरकार ने उन दावों को खारिज किया है कि MDR से जुड़ा फैसला किसी विदेशी दबाव के कारण लिया गया है।
सरकार ने कहा- फैसले को वापस लेने का सवाल नहीं
राहुल गांधी के वीडियो के बाद सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बड़े UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का फैसला किया जा चुका है और इसे वापस लेने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है।
नई MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इसका मुख्य प्रभाव निर्धारित ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर पड़ेगा, जबकि P2P ट्रांजेक्शन और ₹2,000 तक के P2M भुगतान पहले की तरह MDR से बाहर रहेंगे।
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