Home » ताजा खबर » नैनीताल में दूषित पानी से 2 लोगों की मौत, लापरवाही के आरोप में 6 इंजीनियर सस्पेंड

नैनीताल में दूषित पानी से 2 लोगों की मौत, लापरवाही के आरोप में 6 इंजीनियर सस्पेंड

नैनीताल में दूषित पानी से बीमारी और 2 मौतों के बाद बड़ी कार्रवाई, 6 इंजीनियर सस्पेंड

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की वजह से बीमारी फैलने और दो लोगों की मौत के मामले में छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों पर सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप है।

निलंबित अधिकारियों में जल संस्थान के हल्द्वानी स्थित प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता के अलावा पेयजल निगम के भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी जारी की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दूषित पानी से कई गांव प्रभावित, पीलिया के मामले सामने आए

ज्योलिकोट और आसपास के कई गांवों में दूषित पेयजल की आपूर्ति के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए। प्रभावित क्षेत्रों में बेलुवाखान, ज्योलिकोट, गेठिया, सड़ियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी और छीना शामिल हैं। इन इलाकों में कई लोगों के पीलिया से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है।

इस घटना में 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की मौत के बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई थी। इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित गांवों में राहत और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाया। मेडिकल टीमों को घर-घर भेजकर क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस वितरित किए गए। साथ ही, आठ डॉक्टरों और एक एंबुलेंस को प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया।

हाई कोर्ट ने स्थिति को बताया था ‘महामारी’ जैसी

मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था। 8 सितंबर को अदालत ने ज्योलिकोट और आसपास के गांवों में स्वच्छ पेयजल तथा पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्थिति को ‘महामारी’ बताते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को राहत कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करने को कहा था।

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान नैनीताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने अदालत को बताया था कि क्षेत्र में फैली बीमारी का कारण दूषित पानी था। हाई कोर्ट ने पेयजल की जांच केवल सरकारी विभागों तक सीमित न रखने और निजी प्रयोगशालाओं से भी जांच कराने के निर्देश दिए थे।

सीवर और पेयजल पाइपलाइनों की जांच के आदेश

हाई कोर्ट ने जल संस्थान और पेयजल निगम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सीवर और पेयजल की पाइपलाइनें आपस में न मिलें। इसके अलावा नैनीताल शहर में पानी के दूषित होने और सीवर लीकेज की जांच करने तथा 20 से 25 स्थानों से पानी के नमूने लेने को कहा गया।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाए। इसके साथ ही कुमाऊं क्षेत्र में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर संबंधित सचिव को जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए गए।

इंदौर में भी दूषित पानी से हुई थी मौतें

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में भी दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद भी स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

#Nainital #NainitalNews #Uttarakhand #UttarakhandNews #Jyolikot #ContaminatedWater #WaterCrisis #WaterPollution #HealthNews #BreakingNews
Diclaimer : इसका हमारी The भारत SSSRK News24x7 समाचार और राष्ट्र दर्शन (सबसे तेज़, सबसे आगे…),
यह एक आंकलन मात्र है…
sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This

Recent Post