Home » ताजा खबर » क्या मांसाहार शास्त्र सम्मत है? पंचकूला में दिव्य शिव कथा के दौरान स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने समझाया शास्त्रीय पक्ष

क्या मांसाहार शास्त्र सम्मत है? पंचकूला में दिव्य शिव कथा के दौरान स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने समझाया शास्त्रीय पक्ष

॥ श्री राज श्यामा जी सदा सहाय ॥

दिव्य शिव कथा के द्वितीय दिवस में मांसाहार और अहिंसा पर शास्त्रीय विवेचना, स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने वेद-पुराणों के संदर्भों से रखे विचार

पंचकूला, 24 सितंबर 2026 | ई-पोर्टल ब्यूरो।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में अग्रवाल भवन, सेक्टर-16, पंचकूला में आयोजित सात दिवसीय भगवान शिव कथा के द्वितीय दिवस पर मांसाहार और अहिंसा से जुड़े धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर विस्तृत चर्चा हुई। कथा के दौरान “क्या मांसाहार शास्त्र सम्मत है?” विषय पर शिवपुराण सहित विभिन्न शास्त्रीय संदर्भों के माध्यम से विचार प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिदिन की भांति विधिवत पूजन के साथ हुआ और समापन मंगल आरती से किया गया। कथा का आयोजन प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक किया जा रहा है।

व्यास पीठ से शास्त्रीय संदर्भों के साथ विवेचना

व्यास पीठ पर दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के परम शिष्य एवं शिवपुराण मर्मज्ञ स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी विराजमान हैं। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी के माध्यम से धर्म, अध्यात्म, विज्ञान और संगीत से जुड़े विषयों पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

द्वितीय दिवस की कथा में स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने मांसाहार, हिंसा और धार्मिक मान्यताओं को लेकर समाज में प्रचलित विभिन्न धारणाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं द्वारा मांसाहार करने अथवा बलि प्रथा को शास्त्र सम्मत बताने वाली धारणाओं को शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर समझने की आवश्यकता है।

नीलकंठ चरित्र के माध्यम से करुणा का संदेश

स्वामी जी ने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि यह स्वरूप करुणा और त्याग का प्रतीक है। समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव को पशुपतिनाथ कहा जाता है, जिसका अर्थ पशुओं के स्वामी और रक्षक से जुड़ा है। कथा के दौरान इसी प्रसंग के माध्यम से जीवों के प्रति करुणा और अहिंसा का संदेश दिया गया।

महाशिवरात्रि को बताया संयम और साधना का पर्व

महाशिवरात्रि के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने इसे भक्ति, योग, उपवास और आत्मसंयम का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना में जल, बेलपत्र और फल आदि सात्विक सामग्री के प्रयोग की परंपरा रही है।

कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक परंपराओं को समझने और उनके पीछे निहित आध्यात्मिक संदेश पर विचार करने का आह्वान किया।

गुरु और दान के महत्व पर भी हुई चर्चा

स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु शिष्य को अज्ञान से ज्ञान और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने दान के विभिन्न स्वरूपों की चर्चा करते हुए अभयदान और जीवों के प्रति करुणा को विशेष महत्व दिया।

उन्होंने शास्त्रीय संदर्भ देते हुए कहा कि किसी जीव को जीवन प्रदान करना और उसे भय से मुक्त करना भी महत्वपूर्ण आध्यात्मिक भावना है।

मनुस्मृति सहित शास्त्रीय संदर्भों का उल्लेख

कथा के दौरान स्वामी जी ने मनुस्मृति (5/45) का संदर्भ देते हुए अहिंसा से संबंधित श्लोक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से उन्होंने अपने सुख के लिए जीवों की हिंसा करने के कर्मफल की चर्चा की।

उन्होंने शिवपुराण के संदर्भ में भी हिंसा और भगवान शिव की भक्ति के बीच संबंध पर अपने विचार रखे। साथ ही उन्होंने कहा कि भोजन का प्रभाव व्यक्ति के विचारों और व्यवहार पर भी पड़ता है।

युवाओं को सात्विक जीवनशैली अपनाने का संदेश

कथा में सामाजिक विषयों को जोड़ते हुए स्वामी जी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और असंयमित जीवनशैली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सात्विक भोजन, संयम और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि “जैसा अन्न, वैसा मन” की धारणा के माध्यम से भोजन और मानसिकता के बीच संबंध को समझा जा सकता है। उनके अनुसार, स्वस्थ और संस्कारित समाज के निर्माण के लिए युवाओं में सकारात्मक एवं सात्विक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

भजनामृत में झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान भजन एवं संकीर्तन का भी आयोजन हुआ। “जय शिव ओंकारा” और “भोले की फौज, करेगी मौज” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्तिरस में झूमते नजर आए। पूरे पंडाल में शिवभक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

तृतीय दिवस में होगा ‘क्या ईश्वर दिखाई देता है?’ पर विमर्श

कथा के तृतीय दिवस, शुक्रवार 25 सितंबर 2026 को “क्या ईश्वर दिखाई देता है: शास्त्रीय प्रमाण?” विषय पर चर्चा होगी।

इस दौरान सती विहला प्रसंग, शिव तांडव और दक्ष वध जैसे प्रसंगों के माध्यम से सर्वधर्म महिमा एवं निर्गुण ब्रह्म की अवधारणा पर भी विवेचना की जाएगी।

श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से परिवार सहित कथा में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

स्थान: अग्रवाल भवन, सेक्टर-16, पंचकूला
समय: प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक

रिपोर्टर: राजीव कुमार श्रीवास्तव
मो.: 8449777680

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This

Recent Post