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पंचकूला में शिव कथा का चौथा दिन नारी शक्ति के नाम, सती, पार्वती और अर्धनारीश्वर प्रसंग से मिला सशक्तिकरण का संदेश

पंचकूला शिव कथा के चौथे दिन भजनों से गूंज उठा अग्रवाल भवन, स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने बताए शिव-शक्ति और नारी सशक्तिकरण के 3 प्रसंग

पंचकूला | 26 सितंबर 2026 | SSSRK E-PORTAL

पंचकूला के सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में 23 से 29 सितंबर तक आयोजित की जा रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन भक्ति, संगीत और नारी शक्ति के संदेश का विशेष संगम देखने को मिला। कथा के चौथे दिवस का केंद्र बिंदु “कैसे हो सच्चा नारी-सशक्तिकरण?” रहा।

शाम होते-होते कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी और देखते ही देखते अग्रवाल भवन का वातावरण भक्तिमय हो गया।

पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत श्री गणेश पूजन, शिवलिंग के रुद्राभिषेक और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की साध्वियों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्वलित किया गया।

पूजन के बाद कथा स्थल पर भजनांजलि का आयोजन हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग से भर दिया।

भजनों ने बांधा श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में

मुख्य कथा से पहले करीब 45 मिनट तक भजनांजलि हुई। स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

भजन प्रस्तुति की शुरुआत “सत्यम शिवम सुंदरम” से हुई। धीमी और मधुर लय में शुरू हुए इस भजन के साथ धीरे-धीरे श्रद्धालु भी जुड़ते गए।

इसके बाद “नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय” की प्रस्तुति ने माहौल को और ऊर्जावान बना दिया। ढोलक और हारमोनियम की संगत के बीच श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर भक्ति भाव व्यक्त किया।

नारी शक्ति पर केंद्रित “मैया मोरी, शक्ति स्वरूपा” ने कार्यक्रम को भावनात्मक स्पर्श दिया। इस दौरान कई श्रद्धालु भावुक दिखाई दिए।

भजनांजलि के समापन तक पूरा पंडाल भक्ति के वातावरण में डूब चुका था।

मुख्य कथा: “कैसे हो सच्चा नारी-सशक्तिकरण?”

इसके बाद व्यास पीठ से स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने मुख्य कथा और प्रवचन का शुभारंभ किया। आयोजन में उन्हें शिवपुराण के वक्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया। वे दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य हैं।

अपने संबोधन में स्वामी जी ने शिव-शक्ति परंपरा से जुड़े तीन प्रमुख प्रसंगों के माध्यम से नारी के आत्मबल, दृढ़ता और सम्मान पर विचार रखे।

सती का प्रसंग: आत्मसम्मान का संदेश

पहले प्रसंग में देवी सती का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने उनके जीवन प्रसंग के माध्यम से आत्मसम्मान और स्वाभिमान की बात रखी।

उन्होंने कहा कि सती का प्रसंग नारी के आत्मसम्मान और अपने सिद्धांतों के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार, नारी सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि महिला अपने सम्मान और मूल्यों के प्रति सजग रहे।

पार्वती की तपस्या: दृढ़ संकल्प की मिसाल

दूसरे प्रसंग में माता पार्वती की तपस्या का वर्णन किया गया। स्वामी जी ने इसे दृढ़ इच्छाशक्ति, लक्ष्य के प्रति समर्पण और धैर्य का प्रतीक बताया।

उन्होंने युवाओं और विशेषकर महिलाओं से कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और अपने जीवन के लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है।

अर्धनारीश्वर: शिव-शक्ति की एकता का संदेश

तीसरे प्रसंग में अर्धनारीश्वर स्वरूप की व्याख्या की गई।

स्वामी जी ने बताया कि अर्धनारीश्वर की अवधारणा में शिव और शक्ति के एकत्व का संदेश निहित है। उनके अनुसार, यह स्वरूप पुरुष और नारी के परस्पर सहयोग, सम्मान और जीवन में एक-दूसरे की भूमिका को दर्शाता है।

स्वामी जी ने अपने संबोधन में कहा—

“आज हम नारी को बराबरी देने की बात करते हैं, लेकिन शिव ने तो बराबरी की भावना को अपने स्वरूप में ही स्थान दिया। यही शिव-शक्ति का संदेश है।”

उन्होंने आगे कहा कि नारी सशक्तिकरण का अर्थ केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मविश्वास, संस्कार, आत्मबल और अपने अधिकारों की समझ से भी जुड़ा है।

युवाओं को दिया परिवार और नारी सम्मान का संदेश

कथा के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की शुरुआत परिवार से होती है।

उन्होंने युवाओं से अपनी मां, बहन, पत्नी और परिवार की महिलाओं का सम्मान करने का आह्वान किया।

उनके संदेश का केंद्र यह रहा कि किसी भी परिवार की मजबूती आपसी सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता से बनती है।

मंगल आरती के साथ हुआ चौथे दिन का समापन

कथा का समापन रात्रि करीब 9:15 बजे मंगल आरती के साथ हुआ। “जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा” की आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

आरती के समय श्रद्धालुओं द्वारा मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाने का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

27 सितंबर को होगा गाय और विज्ञान पर विशेष विमर्श

शिव कथा के अगले दिवस यानी 27 सितंबर को “क्यों कहते हैं गाय को माता: अंधविश्वास या विशुद्ध विज्ञान?” विषय पर कथा और विचार-विमर्श होगा।

आयोजकों के अनुसार, अगले दिन का विषय धार्मिक मान्यताओं के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी चर्चा का केंद्र रहेगा।

कार्यक्रम की जानकारी

📍 स्थान: अग्रवाल भवन, सेक्टर-16, पंचकूला
📅 तिथि: 23 से 29 सितंबर 2026
⏰ समय: शाम 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक
🎙️ वक्ता: स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी

— ब्यूरो रिपोर्ट
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