॥ श्री राज श्यामा जी सदा सहाय ॥
Youth Special | भगत सिंह जी की स्मृति में युवा शक्ति को समर्पित रहा छठा दिन
पंचकूला | 28 सितंबर 2026, सोमवार | अग्रवाल भवन, सेक्टर-16
पंचकूला के सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में 23 से 29 सितंबर तक आयोजित की जा रही सात दिवसीय “भगवान शिव कथा — सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागृति की सूत्रधार” के छठे दिन का आयोजन युवा शक्ति, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरूकता को समर्पित रहा।
सोमवार को आयोजित छठे दिन की कथा में “राष्ट्र निर्माण में क्या है युवाओं की भूमिका?” विषय को केंद्र में रखते हुए युवाओं को पर्यावरण संरक्षण, देशभक्ति, चरित्र निर्माण और नशामुक्ति का संदेश दिया गया। कथा के दौरान गंगा अवतरण, भगवान कार्तिकेय के चरित्र तथा तारकासुर वध जैसे प्रसंगों के माध्यम से युवा शक्ति की जिम्मेदारियों को आध्यात्मिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से समझाया गया।
कथा का आयोजन प्रतिदिन की तरह सायं 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पूजन से हुआ तथा समापन मंगल आरती के साथ किया गया।
व्यास पीठ से युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश
व्यास पीठ पर दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं भारत विख्यात शिवपुराण मर्मज्ञ स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने अपनी ओजस्वी वाणी के माध्यम से धर्म, अध्यात्म, विज्ञान, संगीत और सामाजिक जागरूकता को जोड़ते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
छठे दिन का मुख्य विषय रहा—
“राष्ट्र निर्माण में क्या है युवाओं की भूमिका?”
कथा के दौरान युवाओं की ऊर्जा और उनकी सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया। स्वामी जी ने भगवान कार्तिकेय के चरित्र को युवा शक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि युवा केवल अपनी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी को समझे।
गंगा अवतरण — पर्यावरण संरक्षण का संदेश
छठे दिन कथा में राजा भगीरथ और गंगा अवतरण का प्रसंग विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
स्वामी जी ने समझाया कि गंगा अवतरण की कथा केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि प्रकृति, जल और पर्यावरण के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी को भी सामने रखती है। उन्होंने युवाओं से नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।
उन्होंने संदेश दिया कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल एवं प्रकृति की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भगवान कार्तिकेय के चरित्र से युवा शक्ति की प्रेरणा
कथा के दूसरे प्रमुख प्रसंग में भगवान शिव के पुत्र श्री कार्तिकेय के चरित्र का वर्णन किया गया।
भगवान कार्तिकेय को देवताओं के सेनापति के रूप में वर्णित करते हुए स्वामी जी ने युवा शक्ति, साहस, अनुशासन और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना पर प्रकाश डाला।
कथा के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग सकारात्मक कार्यों, शिक्षा, राष्ट्र सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और चरित्र निर्माण में होना चाहिए।
आज के दौर में नशे, अत्यधिक मोबाइल उपयोग और अन्य नकारात्मक आदतों के कारण युवाओं के समय और ऊर्जा के प्रभावित होने पर भी चिंता व्यक्त की गई।
तारकासुर वध — संकट के समय युवा शक्ति की भूमिका
कथा में तारकासुर वध के प्रसंग के माध्यम से यह समझाया गया कि जब समाज या राष्ट्र के सामने चुनौती आती है, तब युवा शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्वामी जी ने युवाओं को साहस, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि युवा शक्ति यदि सही दिशा में संगठित हो जाए तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।
नशामुक्ति पर विशेष संदेश
छठे दिन के कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश नशामुक्ति रहा।
भगवान शिव द्वारा विषपान के प्रसंग को वर्तमान समय की नशे की समस्या से जोड़ते हुए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
स्वामी जी के संदेश का सार रहा कि भगवान शिव ने विष को स्वयं धारण करके संसार की रक्षा का प्रतीक प्रस्तुत किया, जबकि आज का युवा नशे जैसी हानिकारक आदतों का शिकार होकर स्वयं और अपने परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है।
इस संदेश के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं और युवाओं ने गंभीरता से नशामुक्त जीवन के महत्व को समझा।
देशभक्ति को जीवन के व्यवहार से जोड़ने का संदेश
कथा के दौरान “भारत माता की जय” के नारों से अग्रवाल भवन का वातावरण राष्ट्रभक्ति से भर उठा।
स्वामी जी ने देशभक्ति को केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन के आचरण से जोड़ने का संदेश दिया।
उन्होंने युवाओं को ईमानदारी से शिक्षा प्राप्त करने, माता-पिता का सम्मान करने, समाज के प्रति जिम्मेदार बनने तथा अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
भक्ति, संगीत और राष्ट्रभावना से सराबोर रहा पंडाल
छठे दिन कथा के दौरान भक्ति संगीत के साथ राष्ट्रभावना से जुड़े गीतों ने वातावरण को विशेष रूप से भावपूर्ण बना दिया।
“नमो नमो शंकरा” जैसे भक्ति भाव से जुड़े भजनों के साथ देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और युवाओं में उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने नशे से दूर रहने तथा सकारात्मक और जिम्मेदार जीवन जीने का संकल्प लिया।
युवा शक्ति के लिए छठे दिन के तीन प्रमुख संदेश
1. पर्यावरण संरक्षण
नदियों, जल और प्रकृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
2. राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी
देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं, बल्कि ईमानदार और जिम्मेदार जीवन जीने में भी दिखाई देती है।
3. नशामुक्त युवा
युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगे, न कि नशे और अन्य हानिकारक आदतों में।
29 सितंबर को होगा सात दिवसीय शिव कथा का महा-समापन
सात दिवसीय कथा का अंतिम दिन मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
अंतिम दिन का विषय रहेगा—
“वर्क-लाइफ बैलेंस के आध्यात्मिक टिप्स क्या हैं?”
अंतिम दिवस पर गणेश उत्पत्ति, महिषासुरमर्दिनी चरित्र और नवरात्रि उत्सव से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से तनाव से शांति और संतुलित जीवन की ओर बढ़ने का संदेश दिया जाएगा।
श्रद्धालुओं से अंतिम दिवस के महा-समापन कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
कार्यक्रम विवरण
📍 स्थान: अग्रवाल भवन, सेक्टर-16, पंचकूला
📅 तिथि: 23 से 29 सितंबर 2026
⏰ समय: सायं 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक
🎙️ वक्ता: स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी
🙏 आयोजन: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान
रिपोर्टर: राजीव कुमार श्रीवास्तव
SSSRK E-PORTAL, पंचकूला
विशेष परिचय: Entrepreneur, Real Estate & New Business Set-up Consultant, Social Activist, Business Coach, Trainer, Leadership Skills Developer & Motivational Speaker
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